दिवाली और भइया दूज बीतने के साथ ही महिलाएं अब छठ पूजा की तैयारी में लग गई है। वाराणसी के जक्खिनी, भीमचंडी, राजातालाब, जगदेवपुर, जंसा आदि इलाकों में सरोवरों और तालाबों की सफाई भी शुरू कर दी गई है। राजातालाब के रानी बाजार का पोखरे में गंदगी जमी है। वहीं भैरवतालाब में भी पानी बहुत कम है।
राजकुमार गुप्ता, योगी राज पटेल, मनोज कुमार पटेल, इंद्रजीत पटेल, कृष्णा जायसवाल आदि ने तालाब के पोखरो की साफ सफाई की मांग की है। वहीं जक्खिनी स्थित पोखरे की अमरेश्वर नारायण सिंह ने सफाई कराना शुरू कर दिया है। डीजल रेल इंजन कारखाना परिसर स्थित सूर्य सरोवर पर आम लोग भी छठ पूजा कर सकेंगे। पूजन समिति के माध्यम से उनको भी सशर्त पास बांटा गया।
इसको लेकर आस-पास के लोगों में हर्ष का माहौल है। जबकि समिति के पदाधिकारी बाहरी लोगों को पास उपलब्ध कराए जाने की बात से मना करते रहे। हालांकि प्राथमिकता डीरेका कर्मचारियों को दी जा रही है। गुरुवार और शुक्रवार को डेढ़ हजार पास जारी किए गए। सभी पास खत्म हो गए।
पास दोबारा छपने के लिए भेजा गया है। रविवार को फिर से पास बंटेंगे। उधर रोहनिया विधायक ने दावा किया है कि सूर्य सरोवर पर पहले जैसे छठ पूजा होती थी उसी तरह से इस बार भी पूजा होगी। पास का कोई मतलब नहीं है। बता दें कि कुल डेढ़ हजार पास बांटे गए। अब रविवार को पास बांटे जाएंगे। उधर व्रती महिलाओं और उनके परिजन पहुंचकर सरोवर पर वेदी आदि बनाते दिखे।
व्रत की बड़ी महिमा
कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले व्रत की बड़ी महिमा है। इस अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत बहुत कुछ कहते हैं। इन लोक त्योहारों पर गाए जाने वाले गीतों में सूर्य चंद्रमा से भी मनुष्य के वार्तालाप का वर्णन है। सूर्य, चंद्रमा, तारा, नदी पर्वत, पेड़, पौधों से बात होती रही है। सूर्य प्रतीक है समदर्शिता का। लोकमंगल का। वह अपनी रोशनी फैलाने में भेदभाव नहीं बरतता।
उसके लिए धनी-गरीब सब बराबर हैं, परंतु उसकी दयादृष्टि अभावग्रस्त और सभी दृष्टि से पिछड़े लोगों पर ही अधिक रहती है। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को नदी किनारे जल में खड़े होकर सूर्य की पूजा की जाती है। यह पूजा डूबते और उगते सूर्य की होती है।
यह भी अपने आपमें अनोखी धारणा और विधान है। निस्तेज की पूजा कोई नहीं करता, परंतु जो सबको तेज देने वाला है, वह भी प्रतिशाम तेजहीन होता है और लोक परंपरा में उसकी भी आराधना होती है। निश्चय ही इस आशा के साथ कि फिर उसका तेज लौटेगा।