वट सावित्री व्रत बृहस्पतिवार को है और इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने वाली महिलाओं के पति पर आया संकट टल जाता है और उनकी आयु लंबी होती है। यह व्रत महिलाओं के लिए खास बताया गया है। हालांकि कोरोना काल में महिलाएं गंगा स्नान तो नहीं करेंगी, लेकिन आसपास मौजूद बरगद के पेड़ की पूजा शारीरिक दूरी को ध्यान में रखते हुए करेंगी। कई महिलाएं वट वृक्ष की टहनी को वृक्ष का प्रतिरूप मानकर यम देव से पति की दीर्घायु, सेहत, रक्षा की कामना करेंगी।
घर में करूंगी पूजा
कैवल्यधाम निवासी अंशिका अग्रवाल बताती हैं पति की दीर्घायु के लिए कई व्रत रखे जाते हैं। इसमें दो प्रमुख व्रतों में एक करवाचौथ और दूसरा वट सावित्री व्रत है। संक्रमण कम हो गया है, लेकिन हमें एहतियात बरतनी होगी, इसलिए घर पर ही गमले में लगे वट वृक्ष की पूजा करूंगी।
लाल पंखे का विशेष महत्व
भेलूपुर निवासी वंदना झा बताती हैं कि मिथिला संस्कृति में वट सावित्री की पूजा में लाल रंग के पंखे, कच्चा पीला सूत व आम का विशेष महत्व होता है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए घर के पास बरगद के पेड़ के नीचे पूजा कर परिवार के स्वास्थ्य और उन्नति की कामना करूंगी।
ऐसे होगी पूजा
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के दिन स्नान, ध्यान करके अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा के बाद वट सावित्री व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद वृट वृक्ष को रोली का तिलक लगाकर चावल, अंकुरित चना, गुड़ एवं हल्दी आदि अर्पित करना चाहिए। अंखड सौभाग्य को मन में लेकर हल्दी से रंग हुए कच्चे सूत को वट वृक्ष को लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद सावित्री व सत्यवान की कथा का पठन व श्रवण कर दीपक दिखाएं।