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Varanasi News: महिलाओं ने पूरी रात बनाए पकवान, रोग से निरोग के लिए भोर में लगाएंगी भोग

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मौसम बदलने के साथ संक्रामक बीमारियों के बढ़ते प्रकोप से मुक्ति के लिए शीतलाष्टमी पर बुधवार को पूजा होगी। दशाश्वमेध घाट स्थित बड़ी शीतला मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए आसपास के जिलों के श्रद्धालु भी हाजिरी लगाने पहुंचेंगे। पूजा के लिए मंगलवार की रात महिलाओं ने गुलगुला, पूड़ी, हलवा जैसे पकवान बनाए। भोर में महिलाएं बसिऔरा पूजा करेंगी।
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स्कंदपुराण के अनुसार देवी शीतला माता की पूजा चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ एवं आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को होती है। क्योंकि, इन मासों के बीच ऋतु परिवर्तन होता है और खासकर संक्रामक रोग फैलते हैं। आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की शीतलाष्टमी पर श्रद्धालु माता से संक्रामक रोग से निरोग के लिए पूजा करते हैं। मंगलवार की रात में बसिऔरा पूजा के लिए घरों में महिलाओं ने पकवान बनाया। वह भोर में मंदिर पहुंचकर पूजा करेंगी। पूजा सुबह 10 बजे तक चलेगी। बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने बताया कि माता शीतला मौसम बदलने से होने वाले रोग चेचक, खुजली, बुखार, खसरा, चेचक, आंखों के रोग से आदि संक्रामक बीमारी होती है तो पूजा से इन रोगों से निदान मिलता है।
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