अदालत में विचारण के दौरान अभियोजन की तरफ से छह गवाह पेश किए गए। अदालत ने पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाया। दुष्कर्म का प्रयास सिद्ध होने पर सात वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना और हत्या के दोष में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।