ये है पूरा मामला
घटना छह जून की है, जब मनोज कुमार रोज की तरह सुबह अपने घर से चन्दासी स्थित श्रीराम धर्मकांटा पर काम करने के लिए निकला था। दोपहर करीब एक बजे वह अचानक यह कहकर कार्यस्थल से निकल गया कि उसके परिचित का एक्सीडेंट हो गया है और उसे अस्पताल जाना है। कुछ ही घंटों बाद टड़िया-पटपरा मार्ग पर सड़क किनारे उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमों का गठन किया और स्वयं लगातार निगरानी शुरू कर दी। चकिया तिराहे स्थित पुलिस बूथ से करीब 15 घंटे तक लगातार पुलिस कार्रवाई की मॉनिटरिंग की गई।
शुरुआती जांच पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रही। मृतक घटनास्थल पर कैसे पहुंचा, उसके साथ कौन था और हत्या के पीछे किसका हाथ हो सकता है, इन सभी सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं था। न कोई प्रत्यक्षदर्शी था और न ही घटनास्थल से ऐसा कोई सुराग मिला था जिससे आसानी से हत्यारों तक पहुंचा जा सके। हालांकि जांच के दौरान मृतक के पास मिली एक डायरी ने पुलिस को एक अहम दिशा दी। डायरी में ब्याज पर रुपये देने और लेन-देन का पूरा हिसाब दर्ज था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
सीसीटीवी फुटेज में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि मृतक अकेला नहीं था। उसके साथ दूसरी साइकिल पर एक व्यक्ति चलता दिखाई दिया, जबकि पीछे एक संदिग्ध मोटरसाइकिल भी नजर आई। इसी दौरान सीडीआर की जांच में एक संदिग्ध कॉल सामने आई, जिसे सीसीटीवी फुटेज से मिलाया गया। जांच का दायरा बढ़ने पर रेलवे के लोको पायलट कृष्ण भगवान सिंह का नाम सामने आया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जहां उसने पूरा राज उगल दिया।
पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2020 में उसने मनोज कुमार से करीब तीन लाख रुपये ब्याज पर उधार लिए थे। शुरुआत में वह नियमित भुगतान करता रहा, लेकिन बाद में बीमारी और पारिवारिक समस्याओं के कारण पैसे नहीं लौटा पाया। समय के साथ ब्याज समेत रकम बढ़कर करीब सात लाख रुपये पहुंच गई थी।
आरोपित के मुताबिक मृतक लगातार रुपये की मांग करता था और उसके घर तक पहुंच जाता था। इसी दौरान उसे अपनी बहू के प्रति मृतक की कथित गलत नीयत का भी संदेह होने लगा था। आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव ने धीरे-धीरे उसके भीतर प्रतिशोध की भावना पैदा कर दी और उसने मनोज को रास्ते से हटाने की ठान ली।योजना के तहत उसने बिहार निवासी अपने परिचित भरत सिंह से संपर्क किया।
भरत ने डेढ़ लाख रुपये लेकर हत्या कराने की जिम्मेदारी ली और अपने साथ सूरज उर्फ राजेश नामक एक अन्य शूटर को शामिल किया।घटना से तीन दिन पहले दोनों शूटर मुगलसराय पहुंचे और कृष्ण भगवान ने उन्हें अपने परिचित के खाली मकान में ठहराया। अगले दो दिनों तक उन्हें घटनास्थल और भागने के रास्तों की रेकी कराई गई।
घटना वाले दिन कृष्ण भगवान ने मिठाई की दुकान से कर्मचारी का मोबाइल लेकर मनोज को फोन किया और रुपये देने के बहाने उसे बुला लिया। फिर साइकिल से उसे सुनसान इलाके की ओर ले गया।
पटपरा गांव के पास उसने रास्ता भूलने और पेशाब करने का बहाना बनाया। इसी दौरान पीछे चल रहे शूटर वापस लौटे और मनोज पर हमला कर दिया। पहले उसके सिर में गोली मारी गई और फिर उसकी मौत सुनिश्चित करने के लिए सीने में दूसरी गोली दागी गई।वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शूटर बिहार की ओर भाग निकले जबकि कृष्ण भगवान सामान्य व्यक्ति की तरह अपने सरकारी आवास लौट गया और बाद में रेलवे ड्यूटी पर निकल गया, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने एक शूटर सूरज उर्फ राजेश को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हथियार बरामद करने के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके दोनों पैरों में गोली मारकर उसे दबोच लिया।पुलिस ने उसके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त .32 बोर पिस्टल, दो खोखे और दो जिन्दा कारतूस बरामद किए हैं।मामले के सफल अनावरण पर अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन ने पुलिस टीम को 50 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।