कार्पेट एक्सपो में विदेशी ग्राहकों और उनके प्रतिनिधियों की अच्छी आमद ने मंदी से मायूस निर्यातकों में बेहतर कारोबार की आस जगा दी है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित कार्पेट एक्सपो के तीसरे दिन 340 से अधिक विदेशी ग्राहकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा, 225 से अधिक विदेशी ग्राहकों के भारतीय प्रतिनिधि भी यहां कालीन की डिजाइन, तकनीक और खासियतों से रूबरू होने पहुंचे। इस बीच एक्सपो का निरीक्षण करने पहुंचीं वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने विदेशी खरीदारों से फीडबैक लिया। निर्यातकों से भी चर्चा की।
कालीन मेले में विभिन्न राज्यों के निर्यातकों की ओर से लगभग 309 स्टाल लगाए गए हैं। इनमें भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, कानपुर के अलावा जम्मू-कश्मीर, जयपुर, दिल्ली आदि स्थानों के निर्यातक शामिल हैं। स्टालों पर एक से एक बेहद खूबसूरत कालीनें प्रदर्शित की गई हैं। 60 देशों से खरीदारी यहां पहुंच रहे हैं और अपनी जरूरत के हिसाब से सैंपल लेकर जा रहे हैं। वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने स्टालाें के निरीक्षण के दौरान कालीन की गुणवत्ता और डिजाइन के साथ-साथ समस्याओं पर भी निर्यातकों से चर्चा की। इस दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से आए खरीदारों से भी बात की। कार्पेट एक्सपो का गुरुवार को अंतिम दिन है। निर्यातकों को उम्मीद है कि अब तक जिस तरह विदेशी खरीदारों और उनके प्रतिनिधियों ने मेले में रुचि दिखाई है और सैंपल लेकर गए हैं, उसे देखते हुए बेहतर ऑर्डर मिल सकता है। बुधवार को सेसन जज ज्ञानपुर ओमप्रकाश शर्मा ने भी कालीन मेले का निरीक्षण किया।
इस बार कार्पेट एक्सपो में कालीन से तैयार पूफ्स (मोढ़े जैसी आकृति) और कुशन के खूबसूरत डिस्प्ले भी लगाए गए हैं। विदेशी ग्राहक इन्हें खास तौर से पसंद कर रहे हैं। खमरिया भदोही स्थित विक्रम कार्पेट्स के रितेश बरनवाल ने बताया कि पूफ्स कार्पेट की पारंपरिक डिजाइन से तैयार हो रहे हैं। इनमें भी कई वैराइटी है। जैसे हैंड टफ्टेड, हैंड नॉटेड आदि। इसकी शुरुआती कीमत दस हजार रुपये है। इसी प्रकार कई स्टालों पर नयापन का अहसास करतीं रंगबिरंगी कुशन भी विदेशी खरीदारों की पसंद बन गए हैं। कार्पेट एक्सपो में खरीदारों और निर्यातकों के बीच वाट्सएप व्यापार की अहम कड़ी बनकर उभरा है। यहां आने वाले विदेशी खरीदार या फिर उनके प्रतिनिधि, पसंद आने वाली कालीनों की तस्वीरें और उसकी खासियतों से संबंधित जानकारियां दूसरे देशों में बैठे अपने अधिकारियों से साझा कर रहे हैं।