वाराणसी। बीएचयू के लिए मंगलवार का दिन किसी मंगल अवसर से कम नहीं था। विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को मिला देश का सर्वोच्च सम्मान उनके तपोस्थली यानी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में था।
महामना को मिले इस भारतरत्न का स्वागत करने के लिए क्या छात्र, क्या छात्राएं, पूरा विश्वविद्यालय परिवार ही सिंह द्वार पर जुटा रहा। ढोल नगाड़ों की थाप और मुख्य द्वार के ऊपर से होती पुष्प वर्षा किसी खास उत्सव का ही एहसास दिला रही थी। इस दौरान ...भारतरत्न की शान बढ़ी है, महामना के शीष चढ़ी है। ...महामना की कामना, सद्भावना.. सद्भावना जैसे जारों से पूरा माहौल गुंजायमान हो रहा था।
दस बजे से ही लंका के सिंह द्वार पर छात्र-छात्राआें की भीड़ भारतरत्न का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। विश्वविद्यालय के अधिकारी और अध्यापक महामना का भारतरत्न लेकर आ रहे कुलपति के इंतजार में गेट पर खड़े थे। सवा ग्यारह बजे जैसे ही कुलपति भारतरत्न लेकर सिंह द्वार पहुंचे ...हर हर महादेव के उद्घोष से जन समूह ने उनका जबरदस्त स्वागत किया।
यहां पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी और महापौर रामगोपाल मोहले, विधायक रविंद्र जायसवाल, एमएलसी केदार सिंह ने महामना की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर पैदल ही मालवीय भवन की ओर चल दिए। उनके पीछे छात्रों और अध्यापकों का लंबा हुजूम चल रहा था।
महिला महाविद्यालय चौराहे पर सैकड़ों छात्राओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां से कुलपति मालवीय भवन पहुंचे, यहां भी मालवीय जी को पुष्प अर्पित कर पैदल ही श्री विश्वनाथ मंदिर गए। यहां जलाभिषेक कर भारतरत्न लेकर वे पुन: मालवीय भवन पहुंचे। इससे पूर्व रणवीर संस्कृत विद्यालय के बटुकों ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। यहां प्रसाद भी बांटा गया।