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Sharda Sinha: अधूरी रह गई शारदा सिन्हा की यह आस, जीते जी कहा था उनके चरणों में सुरों से हाजिरी लगानी है

Wed, 06 Nov 2024 06:13 AM IST
Vikas Kumar माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी

सार

काशी में वह अंतिम बार पांच अक्तूबर 2018 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के नृत्य विभाग में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुई थीं।
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शारदा सिन्हा के छठ गीत - फोटो : इंस्टाग्राम @shardasinha_official
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विस्तार
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रामलला के दर्शन करने के बाद मुझे बाबा के दरबार में भी जाना है। उनके चरणों में सुरों से हाजिरी लगानी है, देखती हूं कब तक ये इच्छा पूरी होती है। यह शब्द थे लोक गायिका शारदा सिन्हा के। अनंत की यात्रा पर जाने से कुछ दिनों पहले उन्होंने अमर उजाला से बातचीत के दौरान जल्द ही काशी आने की इच्छा जताई थी। कहा था कि बाबा काशी विश्वनाथ धाम में हाजिरी लगाने की इच्छा है।

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काशी में वह अंतिम बार पांच अक्तूबर 2018 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के नृत्य विभाग में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुई थीं। प्रस्तुति देने के बाद छात्र-छात्राओं को उन्होंने गायन की विधाओं की बारीकियां बताई थीं। इसके बाद फिर कभी उनका काशी में आना नहीं हुआ। उनके निधन पर बनारस घराने के संगीतकारों और काशी के लोक कलाकारों ने शोक जताया है।

लोकगीत जगत का दैदीप्यमान नक्षत्र हमेशा के लिए अस्त हो गया। उन्होंने अपने सुरों से भोजपुरी जगत को जो सुर दिया उसकी मिठास अनंत काल तक बनी रहेगी। - पंडित छन्नू लाल मिश्र, पद्म विभूषण
 
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उनके गीत गुनगुनाती हैं व्रती महिलाएं
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झुके, ए करेलु छठ बरतिया से झांके झुके। कांचे ही बांस के बहंगिया...। शारदा सिन्हा द्वारा गाए छठ गीत हर साल देशभर में घाटों पर गूंजते हैं। व्रती महिलाएं भी घर से लेकर घाट तक उनके छठ गीत गुनगुनाती हैं। पद्मभूषण शारदा सिन्हा के गीत केलवा के पात पर... एक ऐसा गीत है, जो छठ पूजा करने वालों को उत्साह और आस्था से भर देता है।
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