चिल्ड्रेन वार्ड के पास आग बुझाने के लिए लगाए गए फायर बॉक्स में पाइप भी नहीं मिली। पीडियाट्रिक आईसीयू में गंभीर बच्चों के उपचार के बीच रखे दो ऑक्सीजन सिलिंडरों की वैधता अवधि जनवरी 2026 अंकित थी। यानी कि इसकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। अस्पताल के भूतल स्थित बर्न वार्ड और सर्जरी वार्ड में मरीजों के बेड के ऊपर से बिजली के तार गुजर रहे हैं, जिससे करंट लगने का खतरा बना हुआ है।
रामनगर के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की इमरजेंसी में भी फायर अलार्म सिस्टम खराब मिला। वहीं, चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेद कॉलेज अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगे फायर बॉक्स में पाइप गायब थी। उधर, जिला अस्पताल के कई वार्डों में भी बिजली के तार व्यवस्थित नहीं मिले, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी हुई है।
लंबे समय से नहीं हुआ अग्निशमन विभाग का निरीक्षण
अक्सर किसी अस्पताल, होटल या अन्य संस्थान में आग लगने के बाद ही अग्निशमन विभाग की सक्रियता दिखाई देती है। मंडलीय अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल और शास्त्री अस्पताल में आग से बचाव के इंतजामों की स्थिति देखकर लगता है कि लंबे समय से अग्निशमन विभाग की ओर से प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया। नियमित जांच होती तो खुले तारों को दुरुस्त कराया जाता और फायर अलार्म सिस्टम भी चालू स्थिति में रहता।
अधिकारी बोले
आग लगने से बचाव के लिए नए सिरे से पूरे अस्पताल की फायर ऑडिट कराई जाएगी। फायर अलार्म सिस्टम क्यों बंद हैं, इस पर जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जाएगी। जिस जगह पर तार खुले होंगे, उसको अंदर कराया जाएगा। -डॉ. बृजेश कुमार, प्रमुख अधीक्षक, मंडलीय अस्पताल