इस शक्ति प्रदर्शन के साथ ही रेलकर्मी केंद्र सरकार को 11 अप्रैल के हड़ताल का नोटिस देंगे। एआईआरएफ के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने शनिवार को यह जानकारी पत्रकारों को दी।
उत्तर रेलवे के सामुदायिक हाल में पत्रकारों से बातचीत में शिवगोपाल मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार का रवैया ठीक नहीं है। वार्ता सफ ल नहीं हुई तो देश के 32 लाख रेल कर्मचारी हड़ताल को बाध्य होंगे। इस हड़ताल को रेलवे के सभी कर्मचारी संगठनों का समर्थन हासिल है। उन्होंने निजीकरण पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। कहा कि एआईआरएफ ने सरकार के सामने सातवें वेतन आयोग की सिफ ारिश में संशोधन, पुरानी पेंशन स्कीम को दोबारा शुरू करने सहित 26 मांगें रखी है। उन्होंने कहा कि रेलकर्मी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है।
केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा लंबित मांगों के समर्थन में गत दिनों आयोजित जागरण कार्यक्रमों, रेल हड़ताल के लिए मतदान में 95 प्रतिशत से अधिक का समर्थन मिलने के बाद नार्दन रेलवे मेंस यूनियन द्वारा शनिवार जागृति समारोह का उत्तर रेलवे के सामुदायिक केंद्र में आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित कार्यकर्ताओं को आल इंडिया रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने संबोधित करते हुए कहा कि रेल कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सरकार व रेल मंत्रालय की उदासीनता के फलस्वरूप नार्दन रेलवे मेंस यूनियन 11 अप्रैल को सुबह छह बजे से हड़ताल करने को मजबूर है।
इसके पहले 11 मार्च को उत्तर रेलवे महाप्रबंधक कार्यालय पर प्रदर्शन कर नोटिस दी जाएगी। कामरेड मिश्र ने न्यू पेंशन स्कीम को समाप्त करने, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की नकारात्मक सिफ ारिशों को निरस्त करने सहित विभिन्न मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। राष्ट्रीय महामंत्री ने भारतीय रेल में विदेशी विनिवेश, पीपीपी व श्रम कानूनों में संशोधन के नाम पर रेल कर्मचारियों के साथ धोखे पर भारत सरकार की निंदा की। अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष कामरेड आरजे कनौजिया ने की। मुख्य वक्ता लखनऊ मंडल के मंडल मंत्री कामरेड आरके पांडेय, पूर्व मंडल अध्यक्ष कामरेड प्रदीप शर्मा, एनआरएमयू शाखा मंत्री राजेश सिंह, डीके सिंह, राजकुमार रहे।