गंगा में गंदगी फैलाने वालों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नगर निगम प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। गंगा की स्वच्छता के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन न करने वालों से अब पूरी सख्ती से निबटा जाएगा। गंगा की स्वच्छता के लिए रविवार को मुंशी घाट, शीतला घाट, दशाश्वमेध घाट और पांडेयघाट पर चलाए गए अभियान के दौरान साबुन लगाकर नहाते पाए गए 100 से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई, साथ ही उनसे सामूहिक तौर पर 600 रुपये जुर्माना वसूला गया।
गंगा में साबुन लगाकर नहाने पर जुर्माना वसूली की यह पहली कार्रवाई है। अचानक शुरू हुए अभियान से घाट किनारे हड़कंप की स्थिति नजर आई। निगम सूत्रों के मुताबिक जल्द ही शहर में भी स्वच्छता के लिए कार्रवाई की मुहिम चलाई जाएगी।
गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए नगर निगम ने घाट किनारे शौच, नदी में साबुन लगाकर नहाने, कपड़ा धुलने और मवेशियों को नहलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। जगह-जगह इन प्रतिबंधों के बोर्ड भी लगाए गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर भी इन प्रतिबंधों का अनुपालन कड़ाई से कराने के निर्देश पहले से जारी हैं। लेकिन, प्रतिबंधों का अनुपालन अब तक सुनिश्चित नहीं कराया जा सका है।
प्रतिबंधों की खुलेआम अनदेखी की लगातार सामने आती शिकायतों के बीच अब नगर निगम प्रशासन ने अभियान और कार्रवाई शुरू कर दी है। पांडेयघाट पर चलाए गए अभियान के दौरान साबुन लगाकर नहाते पाए गए सौ से अधिक लोगों को दोबारा ऐसा न करने की सख्त चेतावनी दी गई, उनका साबुन जब्त कर लिया गया। साथ ही, छह सौ रुपये जुर्माना वसूला गया। इस दौरान घाट पर एक किलो पॉलिथीन भी जब्त की गई।
निगम प्रशासन यह अभियान अब लगातार जारी रखेगा। नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने बताया कि घाटों की सफाई के लिए अस्सी से राजघाट तक यह मुहिम चलाई जाएगी। गंदगी फैलाने वालों को अब सिर्फ चेतावनी देकर नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि निर्धारित प्रावधानों के तहत उन पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि जनवरी में कराए गए स्वच्छता सर्वे में वाराणसी की रैंकिंग देश भर में अंतिम पायदान के शहरों में रही।
इसके जरिये वाराणसी में स्वच्छता अभियान की बदहाली उजागर होने के बाद अब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश खुद यहां पर नजर रख रहे हैं। दो दिन पहले ही वह यहां आए थे और अगले साल तक स्वच्छता अभियान की रैंकिंग में सुधार न होने पर इस्तीफा देने की बात कही थी।