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Raksha Bandhan 2023: कौन हैं ये भद्रा, जो इस बार रक्षाबंधन में डाल रही हैं खलल, जानिए- क्या होता है भद्राकाल?

Wed, 30 Aug 2023 04:42 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Bhadra Kya hai: जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। उनके स्वभाव को देखकर सूर्यदेव को उनके विवाह की चिंता होने लगी और वे सोचने लगे कि इसका विवाह कैसे होगा? सभी ने सूर्यदेव के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
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कौन हैं ये भद्रा, जो इस बार रक्षाबंधन में डाल रही हैं खलल, जानिए- क्या होता है भद्राकाल ? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Happy Raksha Bandhan 2023 Muhurat: भाई-बहन के रिश्ते को अटूट और मधुर बनाने का पर्व रक्षाबंधन बुधवार यानि आज रात नौ बजे से अगले दिन सुबह 7:45 बजे मनाया जाएगा। बीएचयू ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि 30 अगस्त, बुधवार को 10 बजकर 58 मिनट पर भद्राकाल में श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि आरंभ हो गई है। पूरे दिन भद्रा काल का साया रहेगा जिसके चलते दिनभर रक्षाबंधन पर राखी नहीं बांधी जा सकेगी। 30 अगस्त को राखी बांधने के लिए कुल मिलाकर 01 घंटा 12 मिनट का समय मिलेगा।

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कौन है भद्रा?
पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य नारायण और पत्नी छाया की कन्या व भगवान शनि की बहन हैं। मान्यता के अनुसार दैत्यों को मारने के लिए भद्रा गर्दभ के मुख और लंबी पूंछ और 3 पैरयुक्त उत्पन्न हुई। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा का स्वभाव भी शनि की तरह है। दैनिक पंचांग में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने भद्रा को पंचांग में विशेष स्थान प्रदान किया है।  

Raksha Bandhan Gift Ideas - फोटो : istock
जन्म लेते ही पहुंचाने लगी विघ्न
जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। उसके स्वभाव को देखकर सूर्यदेव को उसके विवाह की चिंता होने लगी और वे सोचने लगे कि इसका विवाह कैसे होगा? सभी ने सूर्यदेव के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सूर्यदेव ने ब्रह्माजी से उचित परामर्श मांगा। ब्रह्माजी ने तब विष्टि से कहा कि- 'भद्रे! बव, बालव, कौलव आदि करणों के अंत में तुम निवास करो तथा जो व्यक्ति तुम्हारे समय में गृह प्रवेश तथा अन्य मांगलिक कार्य करे, तो तुम उन्हीं में विघ्न डालो। जो तुम्हारा आदर न करे, उनका कार्य तुम बिगाड़ देना।' इस प्रकार उपदेश देकर ब्रह्माजी अपने लोक चले गए। तब से भद्रा अपने समय में ही देव-दानव-मानव समस्त प्राणियों को कष्ट देती हुई घूमने लगी।
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raksha bandhan 2023 - फोटो : अमर उजाला
क्या होता है भद्राकाल ?
शास्त्र के अनुसार जब भद्राकाल प्रारंभ होता है तो इसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। यहां तक कि यात्रा भी नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही भद्राकाल में राखी बांधना भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता के अनुसार चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय किया जाता है। गणना के अनुसार चंद्रमा जब कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि या मीन राशि में होता है। तब भद्रा का वास पृथ्वी में निवास करके मनुष्यों को क्षति पहुंचाती है। वहीं मेष राशि, वृष राशि, मिथुन राशि और वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है एवं देवताओं के कार्यों में विघ्न डालती है। जब चंद्रमा कन्या राशि, तुला राशि, धनु राशि या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। भद्रा जिस लोक में रहती है वहीं प्रभावी रहती है।
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