संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सन 2011 में मिले करीब सवा पांच करोड़ रुपये कहां खर्च हुए, इसका रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। ऑडिट विभाग के एक पत्र के बाद मामला प्रकाश में आने के बाद हड़कंप मचा है।
सहायक निदेशक ऑडिट विभाग ने वित्त अधिकारी से इस धनराशि के खर्च करने संबंधी प्रमाण न मिलने की शिकायत की है।
इसके साथ ही पत्र में 2009-10 से 2014-15 तक के कैशबुक और बैलेंसशीट तैयार न होने से आय-व्यय के आंकड़ों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाया गया है।
मसलन, यह हाल तब है जब ऑडिट विभाग की ओर से वित्त अधिकारी को इस संबंध में आठ बार पत्र भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
विश्वविद्यालय में ऑडिट विभाग के सहायक निदेशक एसपी चौरसिया द्वारा 20 जनवरी को वित्त अधिकारी को भेजे गए पत्र के बाद हड़कंप मचा है।
पत्र में चौरसिया ने वर्ष 2011 में शासन से मिले अनुदान 5,24, 45, 000 (पांच करोड़, चौबीस लाख, पैंतालीस हजार) का जिक्र करते हुए कहा है कि
इस धनराशि के खर्च होने की न तो पुष्टि कराई गई है और न ही अप्रयुक्त अनुदान शासन को वापस किया गया है। कहा है कि यदि यह धनराशि खर्च हुई तो इसका उपभोग प्रमाण पत्र भी शासन को अब तक नहीं भेजा गया है।
सहायक निदेशक के पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2009-10 से 2014-15 तक की कैशबुक, बैलेंसशीट तैयार नहीं है, जिस वजह से विश्वविद्यालय की वास्तविक वित्तीय स्थिति का पता नहीं चल पा रहा है।
यह भी कहा है कि शासन से अनुदान प्राप्त करने के लिए कैशबुक, बैलेंसशीट के अभाव में वित्त समिति, कार्य परिषद द्वारा पारित बजट में आय-व्यय के आंकड़ों की प्रमाणिकता संदेहास्पद प्रतीत होती है।