वहीं, आजमगढ़ मंडल में आजमगढ़ ने सबसे ज्यादा 12267.54 मीट्रिक टन और बलिया 9864.40 मीट्रिक टन खरीद की, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष कम होने से मऊ आगे रहा और 9175.93 मीट्रिक टन खरीद कर पूर्वांचल में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि मिर्जापुर ने पूर्वांचल में सभी जिलों में सबसे ज्यादा 20886.78 मीट्रिक टन खरीद की। वहीं, प्रदेश में चित्रकूट मंडल 66 फीसदी और हमीरपुर जिला शत-प्रतिशत खरीद कर अव्वल रहा।
घर-घर की खरीद फिर भी नहीं बढ़े
वाराणसी के जिला खाद्य विपणन अधिकारी सुनील भारती ने बताया कि जिले में 36 खरीद केंद्र बने थे। इसके अलावा मोबाइल खरीद के लिए 15 वाहन भी रखे गए थे। इसके जरिए घर-घर गेहूं की खरीद के लिए प्रयास किया गया। केंद्र प्रभारियों व लेखपालों को भी लक्ष्य देकर खरीद करवाई गई। किसानों के गेहूं बिक्री के सत्यापन की भी सीमा खत्म कर दी गई थी। जिले में नौ हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 1910.77 मीट्रिक टन खरीद हुई।
फ्लोर मील भी खरीद में बने रोड़े
बिक्री केंद्रों पर गेहूं खरीद कम होने के पीछे फ्लोर मीलें भी हैं, जो किसानों और व्यापारियों से गेंहू खरीद लिए। प्रदीप कुशवाहा ने बताया कि वाराणसी मंडल में 50 से अधिक फ्लोर मीलें हैं, जिनके यहां गेहूं की खपत होती है। चंदौली, गाजीपुर के सटे बिहार और सोनभद्र से मध्यप्रदेश के भी व्यापारी और फ्लोर मीले गेहूं किसानों के पास से उठा ले गए।
वर्जन
किसानों ने शुरू में गेहूं की बिक्री की। बाद में व्यापारियों ने उनके गेहूं को एमएसपी मूल्य से बढ़ाकर उनके गेहूं को उनके घर ही रोकवा दिया। कुछ किसानों ने खुद बिक्री नहीं किए, ताकि कुछ माह बाद गेहूं का मूल्य महंगा होने बिक्री करेंगे। - प्रदीप कुमार कुशवाहा, संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी, वाराणसी मंडल