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भारतीय सभ्यता में निहित है समस्याओं का समाधान

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वाराणसी। अखिल भारतीय कार्यकारिणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि विश्व की शक्तिशाली एवं विकसित सभ्यताओं के जो मापदंड अब तक बने हुए थे वह इस वैश्विक कोरोना महामारी के समय टूटते हुए नजर आ रहे हैं। भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के मूल में ही समस्याओं का समाधान सन्निहित है। वह बृहस्पतिवार को धर्म संस्कृति संगम काशी प्रांत की ओर से आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
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कोरोना महामारी में भारत की भूमिका एवं बोधिसत्व विषयक वेबिनार में उन्होंने कहा कि यह वैश्विक महामारी चीन द्वारा मानव निर्मित व उसके विस्तारवादी नीति के पोषण के लिए जैविक हथियार के रूप में विकसित की गई है। भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति ने भी पूरे विश्व में अपनी सार्थकता को इस महामारी के दौरान सिद्ध किया है। यह बताया है कि यह मात्र खरपतवार न हो करके जीवन रक्षा के लिए एक अमोघ वरदान है।
बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि भारत की परिवार की अवधारणा में ही इस वैश्विक महामारी के समाधान के सूत्र छुपे हैं। हम अपने प्राचीन काल से ही विश्व बंधुत्व से जीते चले आ रहे हैं। भारतीय जीवनशैली, भारतीय दृष्टि व भारतीय मॉडल पूरे विश्व में भारत की भूमिका को वर्तमान में बढ़ा रहे हैं। भारत इस चुनौती को अवसर के रूप में बदलने के अपने प्रयास में सफल होता दिखाई दे रहा है।
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अध्यक्षता करते हुए तिब्बती संस्थान के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही समस्याओं के समाधान का मुख्य स्थान रहा है। विश्व सदैव भारत को तथा भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को की ओर आकर्षित होता रहा है। जब भी विश्व में ऐसी कोई समस्या आई है जिसका समाधान विश्व की किसी भी सभ्यता में नहीं है तो भारत ने मार्ग प्रशस्त किया है। संचालन प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने किया। स्वागत डॉ. माधवी तिवारी, धन्यवाद राहुल सिंह ने किया। मंगलाचरण डॉ. रमेश कुमार नेगी ने किया।
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