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Varanasi News: एआई के प्रति अंधविश्वास से बचना होगा, इंसानी चिंतन क्षमता को बदलना नहीं प्रभावी बनाना है

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असम के राज्यपाल के सलाहकार ने यूपी कॉलेज के एआई कार्यक्रम में कहा- शिक्षक-शोधार्थी खुद की क्षमता विकसित करें
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। उदय प्रताप महाविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से रिसर्च विषय को लेकर ऑनलाइन कार्यक्रम में 200 से ज्यादा शिक्षक जुड़े। बुधवार को ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में असम के राज्यपाल के नई शिक्षा नीति संबंधी सलाहकार और मुख्य अतिथि प्रोफेसर हरबंश दीक्षित ने कहा कि एआई के प्रति अंधविश्वास से बचना होगा। शिक्षकों और शोधार्थियों को अपनी क्षमताओं का लगातार विकास करना होगा ताकि वे तकनीकी प्रगति के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। एआई का इस्तेमाल एक सहायक साधन के रूप में किया जाना चाहिए, न कि उस पर पूर्ण निर्भरता विकसित की जानी चाहिए।
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प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि एआई से इंसानों की चिंतन क्षमता को बदलना नहीं, बल्कि उसे और ज्यादा प्रभावी बनाना है। पहले सत्र के अंत में डॉ. नवीन कुमार यादव ने धन्यवाद दिया। दूसरे सत्र में एआई की तकनीकों और अनुसंधान में उनकी उपयोगिता को बताया गया। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, रांची के कंप्यूटर विभाग के प्रो. सुभाष चंद्र यादव ने कई एआई मॉडलों, उनके एल्गोरिदम, सिस्टम और उपयोगिता की बात बताई। कार्यक्रम में एआई आधारित उपकरणों का सजीव व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को यह प्रदर्शित करके बताया कि वे अपनी भाषा में एआई का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं। अनुसंधान संबंधी कार्यों को सरल और प्रभावी कैसे बना सकते हैं।
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