उन्होंने कुछ ही महीने बाद ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 2009 तक यह पद खाली रहा और मंडलायुक्त कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में दायित्व निभाते रहे। छह साल बाद 2009 में प्रदेश सरकार ने पंडित हरिहर कृपालु त्रिपाठी को तीन वर्ष के लिए अध्यक्ष नामित किया। 2012 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद करीब डेढ़ साल तक यह पद खाली रहा।
वर्ष 2013 में पं. अशोक द्विवेदी को न्यास का अध्यक्ष बनाया गया। वह 2003 में न्यास के सदस्य भी रह चुके थे। वर्ष 2016 में उन्हें दूसरी बार अध्यक्ष बनाया गया। 2019 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2021 में प्रो. नागेंद्र पांडेय को अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
न्यास परिषद का होना जरूरी है। अध्यक्ष और सदस्यों की मौजूदगी में बैठक में सहमति बनती है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम-1983 के नियमों के पालन के लिए यह आवश्यक भी है। जब से अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हुआ, तब से दर्शन करने भी नहीं गया हूं। - प्रो. नागेंद्र पांडेय, पूर्व अध्यक्ष, न्यास परिषद
श्रीकाशी विश्वनाथ न्यास का कार्यकाल समाप्त होने से एक महीने पहले ही संभावित सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए गए थे। मंदिर से जुड़े सभी कार्य नियमित रूप से होते रहे हैं। इस संबंध में समय-समय पर पत्राचार भी हुआ है। अब शासन से निर्णय का इंतजार है। - विश्वभूषण मिश्रा, सीईओ, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर