साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वावधान में पं. विद्या निवास मिश्र के जन्मशती वर्ष में अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय सभागार में बृहस्पतिवार को व्याख्यान हुआ। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के अवदान पर डॉ. रामसुधार सिंह और आचार्य नामवर सिंह के अवदान पर डॉ. विवेक सिंह का व्याख्यान हुआ। साहित्यकार डाॅ. रामसुधार सिंह ने कहा कि आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र मध्यकालीन हिंदी साहित्य के गहन अध्येता, साहित्य इतिहास के लेखक और रीतिकालीन ग्रंथों के पाठ शोध एवं संपादन के लिए विशेष रूप से प्रतिष्ठित हैं। नागरिक प्रचारिणी सभा में विभिन्न पदों पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का संपादन व प्रकाशन किया। डॉ. विवेक सिंह ने नामवर सिंह के आलोचना कर्म पर बोलते हुए कहा कि सृजनात्मक रूप में आलोचना मूलतः व्यक्तिगत प्रयास है क्योंकि किसी आलोचना की सच्ची प्रतिक्रिया तो वैयक्तिक ही हो सकती है। अध्यक्षता बीएचयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप ने की। संचालन हिमांशु उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र नाथ मिश्र ने किया। सरस्वती वंदना पुस्तकालय अध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने किया।