मां विंध्यवासिनी धाम में दो साल में 64% बढ़े श्रद्धालु
विंध्य त्रिकोण में मां विंध्यवासिनी धाम श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। वर्ष 2023 में यहां करीब 73 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 78.15 लाख और 2025 में करीब 1.20 करोड़ हो गई। इस तरह दो वर्षों में दर्शनार्थियों की संख्या में करीब 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वर्ष 2026 में भी श्रद्धालुओं की आमद का सिलसिला तेज है। जनवरी से अगस्त तक करीब 90 लाख श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर चुके थे। यह पिछले पूरे वर्ष के आंकड़े का लगभग 75 प्रतिशत है। शारदीय नवरात्र से पहले ही इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से इस साल नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है।
काली खोह और अष्टभुजा मंदिरों में भी बढ़ी भीड़
धार्मिक पर्यटन के विस्तार का असर मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिरों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में दोनों मंदिरों में कुल करीब 42.36 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 64 लाख हो गई। दो वर्षों में यहां दर्शनार्थियों की संख्या में 51 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट है कि श्रद्धालु अब मां विंध्यवासिनी के दर्शन के साथ पूरी त्रिकोण परिक्रमा को भी अपनी यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं।
ड्रोन से ली गई मंदिर के आसपास की तस्वीर।
- फोटो : संवाद
208 करोड़ रुपये से हो रहा सुविधाओं का विस्तार
विंध्याचल में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक स्थलों के विकास पर करीब 208.09 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत मां की पैड़ी, संपर्क मार्गों, परिक्रमा पथ, आसपास की सड़कों और मुख्य मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मां विंध्यवासिनी धाम के साथ काली खोह और अष्टभुजा मंदिर क्षेत्रों में भी आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। पहाड़ी मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने में रोपवे की अहम भूमिका है। इससे बुजुर्गों और परिवारों को सहूलियत मिल रही है।
त्रिकोण परिक्रमा योजना के तहत मां काली खोह क्षेत्र के विकास के लिए 35.50 करोड़ रुपये की परियोजना अक्तूबर में निविदा प्रक्रिया तक पहुंच गई। सरकार का जोर तीनों मंदिरों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पूरे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर है।
वाराणसी और प्रयागराज से जोड़कर बनाए यात्रा पैकेज
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने 'विजिट माय स्टेट' पहल के तहत दो विशेष यात्रा पैकेज शुरू किए हैं। दो दिन और एक रात के पैकेज में वाराणसी और विंध्याचल को जोड़ा गया है। पर्यटक काशी के मंदिरों और घाटों के साथ विंध्य त्रिकोण के तीनों देवी मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे।
दूसरा पैकेज दो रात और तीन दिन का है। इसमें लखनऊ, वाराणसी, विंध्याचल और प्रयागराज को एक धार्मिक यात्रा सर्किट में शामिल किया गया है। इससे श्रद्धालुओं को शक्ति उपासना की परंपरा के साथ काशी और संगम क्षेत्र के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा।
शक्तिपीठ सर्किट का प्रमुख केंद्र बनेगा विंध्याचल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विंध्याचल में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या विकास कार्यों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धाम को केवल एक मंदिर तक सीमित रखने के बजाय संपूर्ण शक्ति पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। विंध्याचल प्रदेश के विस्तारित शक्तिपीठ सर्किट का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तर प्रदेश की शक्ति उपासना परंपरा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं और सुव्यवस्थित यात्रा पैकेजों से तीर्थयात्रा आसान होगी। इससे पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय कारोबारियों व समुदायों को लाभ मिलेगा।
श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से होटल, परिवहन, गाइड, खानपान, फूल-माला और प्रसाद कारोबार को विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।