वाराणसी। आधा दर्जन से अधिक गांव के बाशिंदों का विरोध लगातार तीसरे दिन रविवार को भी जारी रहा। इसके चलते रमना स्थित अस्थाई डंपिंग ग्राउंड में कचरा नहीं गिराया जा सका। दोपहर मामला सुलझाने गए नगर निगम के अधिकारियों और लंका थानाध्यक्ष को ग्रामीणों से नोकझोंक के बाद बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि किसी भी सूरत में शहर की गंदगी गांव वालों के सिर नहीं थोपने दी जाएगी। तीन दिन से कूड़े का उठान न होने के कारण 1800 मीट्रिक टन से ज्यादा शहर में कचरा डंप पड़ा हुआ है। कूड़ा घरों, गलियों और सड़कों पर कचरा फैलने से हालात बदतर हो रहे हैं।
नगर निगम शहर का कचरा रमना में गिरा कर उसमें आग लगा देता है। कचरे के धुएं से परेशान होगा रमना, सीरगोवर्धनपुर, डाफी, नरायनपुर, नैपुरा, नरोत्तमपुर, टिकरी, तारापुर, मलहिया, मदरवां सहित अन्य गांवों के लोगों ने शुक्रवार की सुबह रमना में कूड़ा गिराने से नगर निगम को रोक दिया था। तब से ग्रामीण वहां कूड़ा नहीं गिराने दे रहे। रविवार की सुबह निगम तहसीलदार अविनाश कुमार, प्रभारी अधिकारी (परिवहन) डॉ. असलम अंसारी और लंका थानाध्यक्ष रमना पहुंचे और वहां धरना दे रहे ग्रामीणों को
समझाने की कोशिश की लेकिन बात बनी नहीं। ग्रामीणों ने कहा कि कचरे के ढेर और इसके धुएं ने उनका भोजन, पानी, स्वास्थ्य, खेती, पशुपालन सहित सभी चीजों पर विपरीत प्रभाव डाला है। अब वे और नहीं सहेंगे। इस दौरान डंपिंग ग्राउंड में पंप लगाने गई बोरिंग मशीन को ग्रामीणों ने वापस भेज दिया। नगर निगम के अधिकारी भी लौट गए। विरोध प्रदर्शन में अमित पटेल, राधेश्याम मिश्रा, प्रदीप जायसवाल, राकेश यादव, अजय पटेल, सतीश मिश्रा, राजू पटेल, अमनदीप, राजकुमार यादव, राजेंद्र, अरविंद पटेल, गुड्डू यादव, रामानंद यादव आदि रहे।