कालभैरव मंदिर के महंत परिवार के राजेश मिश्र ने बताया शिवजी ने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए भैरव का रौद्र रूप धारण किया था। उन्होंने गर्भ से जन्म नहीं लिया था तो उनका जन्मोत्सव मनाने की कोई परंपरा नहीं है। उनके प्राकट्योत्सव पर जप, तप और आराधना करने का विधान है। चाहे काल भैरव मंदिर में हुआ हो या बटुक भैरव मंदिर में जो हुआ वह बेहद निंदनीय है।
बटुक भैरव मंदिर के महंत परिवार के राकेश पुरी ने बताया कि बटुक भैरव का वायरल वीडियो आठ साल पुराना है, जिसे किसी ने अब डाला है। श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म को इवेंट ना बनाएं। भगवान शिव के रौद्र रूप हैं बाबा कालभैरव, उनकी पूजन और प्राकट्योत्सव का अपना विधान है। प्रचार प्रसार के लिए इसे विकृत करना उचित नहीं है।