जिले में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है। वहीं 71.262 मीटर पर खतरे का निशान है। वहीं 09 सितंबर 1978 को आई बाढ़ के दौरान गंगा का जल स्तर सर्वाधिक 73.901 मीटर तक पहुंच गया था। इस तरह वर्तमान में जिले में गंगा चेतावनी बिंदु से 2.22 मीटर नीचे हैं। टांडाकला संवाददाता के अनुसार गंगा के जल स्तर में बढ़ोतरी लगातार जारी है। पिछले 10 दिनों में 15 फीट से अधिक पानी चढ़ गया है।
इसके कारण गंगा तटवर्ती गांव भूपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर , पकड़ी, महुअरिया, विशुपुर , महुआरी खास , सराय , बलुआ , डेरवा कला, महुअर कला, हरधन जुड़ा, गंगापुर, चकरा, हरधन जुड़ा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली, तीरगावां, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा , सहेपुर, मुकुंदपुर, नौदर आदि गंगा के किनारे खेतों में रोपी गई सब्जियां, ज्वार, बाजरा आदि डूब गई है। इससे तटवर्ती इलाके के लोग परेशान हैं। वहीं खेतों तक पानी पहुंचने से सर्प और बिच्छू गांव में पहुंचने लगे हैं।
कुंडा खुर्द गांव में 200 वर्ष पुराना पीपल का पेड़ गंगा में समाया
नियामताबाद विकास खंड के कुंडा खुर्द, कुंडा कला, मवई, बहादुरपुर, लेड़वापुर सहित अन्य गांवों में कटान शुरू हो गया है। सबसे अधिक गंगा कटान कुंडा खुर्द गांव में हो रहा है। बुधवार की सुबह गंगा कटान के कारण तट पर 200 वर्ष पुराना पीपल का पेड़ गंगा में समा चुका है। वहीं ग्राम सभा की ओर से बनाया गया कूड़ा घर तक पानी पहुंच गया है। यदि जल्द ही कटान पर रोक नहीं लगी तो यह भी गंगा में समा सकता है।
इलाके में गंगा कटान का दंश लोग लंबे समय से झेल रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में कुंडा खुर्द गांव में 20 बीघा तक भूमि गंगा में समा चुकी है। वहीं इस वर्ष पिछले एक सप्ताह के भीतर गांव के राजेंद्र यादव, राम करण, महंगू राम, मुकेश, रिंकू सिंह, बाबूलाल, राम मूरत सिंह, विनोद सिंह, पप्पू, श्याम करण आदि के लगभग ढाई बीघा खेत गंगा में समाहित हो गए हैं। इसको लेकर गांव के लोगों में दहशत है।
गांव के प्रधान भैया लाल यादव ने बताया कि इस वर्ष ढाई बीघा भूमि गंगा कटान में समाहित हो चुकी है। वहीं गंगा का जल स्तर कूड़ा घर तक पहुंच गया है। इससे गांव के लोग दहशत में हैं। जिस तेजी से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है। उससे जल्द ही बाढ की आशंका बन गई है।