वाराणसी। महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती रविवार को शहर में विभिन्न स्थानों पर मनाई गई। वैदिक धर्म के पुनरुत्थान और समाज सुधार में उनके योगदान को याद किया गया। 1825 में गुजरात के टंकारा में जन्में दयानंद सरस्वती ने अपना पूरा जीवन वेदों के प्रचार और समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में समर्पित कर दिया। 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और सत्यार्थ प्रकाश नामक ग्रंथ भी लिखा। जयंती के अवसर पर जिले के आर्य समाजों में यज्ञ, ऋषि चर्चा और प्रसाद वितरण हुआ। भोजूबीर, लल्लापुरा, कोनिया, चिरईगांव, दुर्गाकुंड, रामनगर, खोजवां, भोगाबीर, जैतपुरा, काशी हिंदू विवि और चितईपुर के आर्य समाजों में कई भक्त शामिल रहे। पाणिनि कन्या महाविद्यालय और मातृ मंदिर कन्या गुरुकुल की छात्राओं ने उनके भजन गाकर वेदों का प्रचार किया। संवाद