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वेद ऋचाओं के स्वर गूंजे, झंकृत हुए प्रभाती राग

Mon, 24 Oct 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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सुबह-ए-बनारस के 700 दिन पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में सरोद वादन करते पं. विकास महाराज।
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प्रभाती रागों की सुर, लय , ताल की त्रिवेणी ने रविवार की अरुणोदय की बेला में एक सुहानी सुबह का आगाज किया। एक तरफ पाणिनी कन्या महाविद्यालय की देव कन्याओं के सस्वर वेदपाठ की गूंज सुनाई देने लगी तो दूसरी ओर घंटे-घड़ियाल के साथ कपू, घी के दीयों और गुगुल दशांग से पतितपावनी गंगा की महाआरती शुरू हुई। सुबह-ए-बनारस की महफिल के सात सौ दिनों का सफर पूरा होने पर अस्सी घाट पर आयोजित सप्तसती समारोह का नजारा ऐसा ही थी।
गंगा की मचलती लहरों पर एक तरफ अरुणिमा की रश्मियां तैरती-इठलाती बढ़ती दिख रही थीं, तो दूसरी ओर सुबह के राग सरोद के तारों पर झंकृत हो रहे थे। यश भारती प्राप्त पं. विकास महाराज ने सरोद के तारों को छेड़ा।
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राग भैरवी की अवतारणा उन्होंने अलाप, जोड़, झाला के साथ थी। मध्य लय तीनताल में निबद्ध गत बोल जब वह बजाने लगे तब संगीत रसिक बरबस झूम उठे। उनके साथ तबले पर संगत की प्रभाष महाराज ने। सीडीओ पुलकित खरे ने अतिथि के तौर पर उपस्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ  दुबे, डीरेका के जीएम राकेश ऐरन, उत्तर रेलवे के वाणिज्य अधीक्षक रवि चतुर्वेदी और रायबरेली के पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह को सम्मानित किया। डीजीएम  (बैंक ऑफ बड़ौदा) शिशिर भूषण प्रसाद और बैंक के कलस्टर हेड मनीष टंडन ने अतिथियों का स्वागत। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ रत्नेश वर्मा ने माल्यार्पण किया। संचालन किया डॉ प्रीतेश आचार्य ने। इस मौके पर सुबह-ए-बनारस परिवार के डॉ. राजेश्वर आचार्य, सुनील शुक्ला, कैलाश बर्मन, विजय प्रकाश मिश्र, अजय गुप्ता, विष्णु यादव, अतुल सिंह समेत कई लोग उपस्थित थे। सुबह- ए -बनारस के 700 दिन पूरे होने पर स्मारिका का भी विमोचन हुआ।
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प्रभाती रागों के साथ होने वाली नित नई सुबह दिन पर दिन निखार ले रही है। कभी जहां विदेशियों के लिए सुबह-ए- बनारस नौका बिहार तक सीमित था, वहीं अब यह संगीत के स्वरों से अपना नया विस्तार ले रहा है। पौ फटने से पहले ही यहां योग और आरती के लिए भीड़ लग जाती है। बनारस की खुशनुमा सुबह में संगीत के स्वरों से प्राण भरने वाली इस महफिल की शुरुआत 24 नवंबर 2014 को हुई थी।
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