सपाइयों ने इस फैसले को अनुचित कदम बताते हुए अब सड़कों पर उतर कर लड़ाई शुरू कर दी है। सपा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को टाउनहॉल स्थित गांधी प्रतिमा के पास मौन सत्याग्रह किया और मौजूदा सरकार पर सवाल उठाया। सत्याग्रह पर बैठे समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश महासचिव किशन दीक्षित ने कहा कि काशी के प्रतीक चिन्हों को विकास के नाम पर तोड़कर भाजपा सरकार वाराणसी की विरासत को ही खंडित कर देना चाहती है।
कहा कि यूपी सरकार के फैसले से क्षुब्ध होकर हम समाजवादी मौन सत्याग्रह कर रहे हैं। किशन दीक्षित ने कहा कि गांधी चबूतरा और भारत माता मंदिर को सिर्फ तोड़ा ही नहीं गया बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को समाप्त करने की कोशिश की गई है। पिछले साल राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ व गांधी विद्या संस्थान परिसर को भी ध्वस्त करके जबरन कब्जा किया गया।
विकास के नाम पर काशी की धरोहर और प्रतीक चिह्नों को लगातार नष्ट करके काशी की संस्कृति, इतिहास पर हमला किया जा रहा है। इसी तरह भाजपा सरकार ने कॉरिडोर निर्माण के नाम पर काशी की प्राचीन पहचान को मिटा दिया है और शहर के आध्यात्मिक-धार्मिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है।
गांधी प्रतिमा के पास सपा कार्यकर्ताओं ने मुंह पर काली पट्टी व हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। तख्तियों पर 'क्योटो के सपने पर बुलडोजर की योजनाएं, काशी की धरोहर गिर रही है और भाजपा के वादे टूट रहे हैं, गांधी की विरासत तो गिरा दोगे लेकिन उनके विचारों को कैसे मिटाओगे' जैसे स्लोगन के जरिए सरकार के खिलाफ मौन सत्याग्रह किया। मौन सत्याग्रह में रविकांत विश्वकर्मा, संदीप मिश्रा, राहुल गुप्ता, रोहित यादव, महेंद्र सिंह, अहमद रजा कमाली, पप्पू यादव, शानू सिन्हा आदि रहे।