फिल्म मणिकर्णिका में कंगना रनौत की तर्ज पर भी मां की प्रतिमा बनाई गई है। यह भेलूपुर के पूजा पंडाल में विराजमान हैं। मां मोर के सिंहासन पर विहंगम मुद्रा में बैठी हैं। उधर, सोनारपुरा में दो से पांच फीट की प्रतिमाएं हैं।
इसमें सरस्वती के साथ मां काली और दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ शिवजी और गणेश जी भी हैं। साथ ही नृसिंह भगवान ढोलक, मानव रूप में नंदी डमरू बजा रहे हैं। साथ ही बत्तख नाच रहे हैं। दक्षिण भारतीय, प. बंगाल के गहनों और रुद्राक्ष से मां सरस्वती का 3 दिन शृंगार होगा।
माघ मास शुक्लपक्ष के चौदह दिवस पक्ष और सप्त महायोग में सोमवार को वसंत पंचमी मनाई जाएगी। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा पांच शुभ मुहूर्त में होगी। जो सुख-समृद्धि के साथ भक्तों के लिए काफी लाभकारी है। इसके साथ ही बसंत ऋतु भी शुरू हो जाएगी। इस दिन शुभ कार्य भी किए जाते हैं। सोमवार को सुबह 09.36 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। मगर, वसंत पंचमी दिनभर मनाई जाएगी।
पंचांगों के अनुसार माघ मास शुक्लपक्ष 15 दिन का होता है। मगर, इस बार 27 साल बाद यह 14 दिनों का है। इस बार सप्तमी तिथि का क्षय हो रहा है। पंचांगों के अनुसार पंचमी तिथि रविवार को पूर्वाह्न 11.53 बजे से शुरू हो गई है, जो सोमवार को सुबह 09.36 बजे तक रहेगी। मगर, उदया तिथि मान्य होने से वसंत पंचमी सोमवार को ही मनाई जाएगी।
पंचमी तिथि पर रेवती नक्षत्र में सिद्ध योग, शुभ, मातंग, रवि, ययीजय, शुभ कर्तरी, बुधादित्य योग लगेगा। शुक्र अपने उच्च राशि मीन में स्थापित रहेंगे। वसंत पंचमी अपुच्छ मुहूर्त के रूप में भी मान्य है। शास्त्रों में इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ कार्य करने के लिए स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है।
वसंत पंचमी पर अमृत मुहूर्त सुबह 07:07 से 08:29 बजे तक, शुभ मुहूर्त सुबह 09:51 से 11:13 बजे तक, चर मुहूर्त दोपहर 01:56 से 03:18 बजे तक, लाभ मुहूर्त दोपहर 03:18 से 04:40 बजे तक, अमृत मुहूर्त शाम 04:40 से 06:01 बजे तक रहेगा।
गंगा स्नान के लिए उमड़ेगी भीड़
महाकुंभ में सोमवार को तीसरा अमृत स्नान होगा तो वहीं काशी में भी स्नान के लिए भीड़ रहेगी। वैसे यह महाकुंभ के पलट प्रवाह का असर है। मगर आसपास जिलों के लोग भी मां गंगा में स्नान कर दर्शन पूजन करने आएंगे।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को वसंतोत्सव मनाया जाएगा। सुबह परिसर में मुख्य द्वार के पास बने वाग्देवी मंदिर में विशेष सरस्वती पूजा की जाएगी। कुलपति समेत अन्य प्रोफेसर विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा करेंगे। संगीत विभाग की ओर से सरस्वती वंदना सहित अन्य कार्यक्रम की प्रस्तुति भी की जाएगी।
रविवार को वाग्देवी मंदिर पर देर शाम तक उत्सव के मनाए जाने संबंधी तैयारियां चलती रहीं। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि वसंत पंचमी भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। मां सरस्वती की पूजा से हम सभी के भीतर नई शक्ति का अर्जन होता है और उस शक्ति पर बुद्धि का नियंत्रण होता है। यह दिन शिक्षा, संस्कृति और कला के क्षेत्र में नए संकल्पों और प्रेरणाओं का प्रतीक है।