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वसंत पंचमी : 500 पूजा पंडालों में बड़ी महारानी, मीराबाई और शेरावाली के रूप में सजीं मां सरस्वती; जानें मुहूर्त

Sun, 02 Feb 2025 11:52 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी नगरी में सोमवार को मां सरस्वती की पूजा की धूम रही। जगह-जगह पूजा पंडालों में मां की प्रतिमाएं स्थापित हो गई थीं। विद्या की देवी के पूजन के लिए विधि-विधान से अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
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विस्तार
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Vasant Panchami 2025 : वसंत पंचमी सोमवार को मनाई जाएगी। मां सरस्वती की प्रतिमाएं रविवार को पूजा पंडालों में पहुंच गई हैं। आकर्षक सजावट भी हो गई है। चेतगंज में बड़ी महारानी, पद्मासन पर विराजीं मीराबाई, गिलट बाजार में दस हाथ वाली दुर्गा स्वरूप वाली मां सरस्वती विराजमान हैं। इस बार शहर में कई प्रतिमाएं पश्चिम बंगाल के चंदननगर की तर्ज पर बनी हैं।

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सरस्वती पूजा के लिए शहर से लेकर गांव तक 500 से अधिक पूजा पंडाल बनाए गए हैं। इस बार नए ट्रेंड में शहर में 50 से अधिक बड़ी प्रतिमाएं विराजित हैं। रविवार को भी खोजवां, देवनाथपुरा, बाईपास इलाकों की मूर्तियां कारखानों से पूजा पंडाल गईं। 

गिलट बाजार में मां दुर्गा के रूप में मां सरस्वती की प्रतिमा है। मां के 10 भुजाएं हैं। साथ में दो शेर भी हैं। चेतगंज में बड़ी महारानी की 42 फीट की प्रतिमा देश की दूसरी बड़ी प्रतिमा है। इसी इलाके में मीराबाई की तरह बिना मुकुट पहने खुले बाल और घाघरा चोली पहनीं पद्मासन मुद्रा में बैठी प्रतिमा भी आकर्षक है। 
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खोजवां के सुदामापुर की प्रतिमा में मां सरस्वती की गोद में श्रीगणेश और नीचे कार्तिकेय बैठे हैं। मां को दीदी के रूप में दर्शाया है। रेशम कटरा में मां सरस्वती बैठी मुद्रा में हैं, यहां श्रीराम जी की मूर्ति भी है। भदैनी में बाबा विश्वनाथ के शिवलिंग के नीचे मां विराजमान हैं। 

आदी बंगला चाल की साज पर सोनिया गुजराती गली में भी मां की प्रतिमा है। वसंत पंचमी के लिए बाजार में कोलकाता से मिट्टी की 5 इंच से 3 फीट की मां सरस्वती की मूर्तियां भी बिकीं।

फिल्म मणिकर्णिका में कंगना रनौत के रूप में मां

फिल्म मणिकर्णिका में कंगना रनौत की तर्ज पर भी मां की प्रतिमा बनाई गई है। यह भेलूपुर के पूजा पंडाल में विराजमान हैं। मां मोर के सिंहासन पर विहंगम मुद्रा में बैठी हैं। उधर, सोनारपुरा में दो से पांच फीट की प्रतिमाएं हैं। 

इसमें सरस्वती के साथ मां काली और दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ शिवजी और गणेश जी भी हैं। साथ ही नृसिंह भगवान ढोलक, मानव रूप में नंदी डमरू बजा रहे हैं। साथ ही बत्तख नाच रहे हैं। दक्षिण भारतीय, प. बंगाल के गहनों और रुद्राक्ष से मां सरस्वती का 3 दिन शृंगार होगा।

आज सप्त महायोग और 5 शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

माघ मास शुक्लपक्ष के चौदह दिवस पक्ष और सप्त महायोग में सोमवार को वसंत पंचमी मनाई जाएगी। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा पांच शुभ मुहूर्त में होगी। जो सुख-समृद्धि के साथ भक्तों के लिए काफी लाभकारी है। इसके साथ ही बसंत ऋतु भी शुरू हो जाएगी। इस दिन शुभ कार्य भी किए जाते हैं। सोमवार को सुबह 09.36 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। मगर, वसंत पंचमी दिनभर मनाई जाएगी।

पंचांगों के अनुसार माघ मास शुक्लपक्ष 15 दिन का होता है। मगर, इस बार 27 साल बाद यह 14 दिनों का है। इस बार सप्तमी तिथि का क्षय हो रहा है। पंचांगों के अनुसार पंचमी तिथि रविवार को पूर्वाह्न 11.53 बजे से शुरू हो गई है, जो सोमवार को सुबह 09.36 बजे तक रहेगी। मगर, उदया तिथि मान्य होने से वसंत पंचमी सोमवार को ही मनाई जाएगी। 

पंचमी तिथि पर रेवती नक्षत्र में सिद्ध योग, शुभ, मातंग, रवि, ययीजय, शुभ कर्तरी, बुधादित्य योग लगेगा। शुक्र अपने उच्च राशि मीन में स्थापित रहेंगे। वसंत पंचमी अपुच्छ मुहूर्त के रूप में भी मान्य है। शास्त्रों में इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ कार्य करने के लिए स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है।

पूजन के ये हैं मुहूर्त

वसंत पंचमी पर अमृत मुहूर्त सुबह 07:07 से 08:29 बजे तक, शुभ मुहूर्त सुबह 09:51 से 11:13 बजे तक, चर मुहूर्त दोपहर 01:56 से 03:18 बजे तक, लाभ मुहूर्त दोपहर 03:18 से 04:40 बजे तक, अमृत मुहूर्त शाम 04:40 से 06:01 बजे तक रहेगा।

गंगा स्नान के लिए उमड़ेगी भीड़
महाकुंभ में सोमवार को तीसरा अमृत स्नान होगा तो वहीं काशी में भी स्नान के लिए भीड़ रहेगी। वैसे यह महाकुंभ के पलट प्रवाह का असर है। मगर आसपास जिलों के लोग भी मां गंगा में स्नान कर दर्शन पूजन करने आएंगे।
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संस्कृत विश्वविद्यालय कैंपस में मनेगा वसंतोत्सव

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को वसंतोत्सव मनाया जाएगा। सुबह परिसर में मुख्य द्वार के पास बने वाग्देवी मंदिर में विशेष सरस्वती पूजा की जाएगी। कुलपति समेत अन्य प्रोफेसर विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा करेंगे। संगीत विभाग की ओर से सरस्वती वंदना सहित अन्य कार्यक्रम की प्रस्तुति भी की जाएगी।

रविवार को वाग्देवी मंदिर पर देर शाम तक उत्सव के मनाए जाने संबंधी तैयारियां चलती रहीं। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि वसंत पंचमी भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। मां सरस्वती की पूजा से हम सभी के भीतर नई शक्ति का अर्जन होता है और उस शक्ति पर बुद्धि का नियंत्रण होता है। यह दिन शिक्षा, संस्कृति और कला के क्षेत्र में नए संकल्पों और प्रेरणाओं का प्रतीक है।
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