केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने आज नई दिल्ली में कहा कि बनारस में 170 करोड़ की लागत से बन रहे मल्टी मॉडल टर्मिनल से यह शहर सामानों की आवाजाही के लिए एक बड़ा हब बन जाएगा जो उत्तर भारत को पूर्वी, पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश से जोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वाराणसी में निर्माणाधीन टर्मिनल में जलमार्ग, रेल और सड़क सपर्क होगा।
यह सरकार की 5369 करोड़ की जल मार्ग विकास परियोजना का हिस्सा है। गडकरी ने बताया कि सरकार माल ढुलाई की कीमतों में कमी लाने के लिए काफी काम कर रही है और यह परियोजना उसी का हिस्सा है।
यह टर्मिनल भारत के परिवहन मॉडल को दुरुस्त करेगा। बता दें कि अगस्त 2016 में गडकरी ने गंगा को यातायात के लिए लायक बनाने के लिए इस टर्मिनल की आधारशिला रखी थी।
उन्होंने कहा कि अगस्त 2018 तक मल्टी मॉडल टर्मिनल का पहला चरण पूरा हो जाएगा। इसके बाद सीमेंट, खाद्यान सामग्री, उर्वरक आदि का परिवहन किया जा सकेगा।
इस टर्मिनल को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या सात और जीवनाथपुर रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाएगा। यहां दो जहाज खड़े हो सकेंगे। पहले चरण में वाराणसी टर्मिनल से हर साल .54 मिलियन टन सामान की ढुलाई की जा सकेगी।
वाराणसी टर्मिनल से होगी खर्च में कटौती
लुधियाना से वाराणसी के रास्ते सामान हल्दिया तक पहुंचाया जा सकेगा
जहाजरानी मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण के बाद पंजाब के लुधियाना से वाराणसी के रास्ते सामान को पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक पहुंचाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि कई सरकारी और निजी कंपनियों ने जलमार्ग के रास्ते सामान भेजने की इच्छा जताई है। यह जलमार्ग शुरु हो जाने के बाद कोलकाता बंदरगाह के जरिये यह उत्तर भारत को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अन्य दक्षिणी पूर्वी एशियाई को जोड़ेगा।
अभी तक इन देशों को गुजरात के कांडला और मुंबई बंदरगाह के जरिये सामान भेजा जाता है। इसमें काफी खर्च आता है।
वाराणसी टर्मिनल बन जाने के बाद इस खर्च में काफी कमी आएगी। बता दें कि जलमार्ग से सामान भेजने पर प्रति टन प्रति किमी 30 से 50 पैसे खर्च आता है। वहीं रेल से यह एक रुपये और सड़क मार्ग से डेढ़ रुपये है।