राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत जारी रैंकिंग में वाराणसी ने देश के 131 शहरों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2017 से 2024 के बीच के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी में अति सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) के स्तर में 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह सुधार पूरे देश के किसी भी शहर की तुलना में सर्वाधिक है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस उपलब्धि को काशीवासियों के सहयोग और टीम वर्क का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि शहर में धूल नियंत्रण के लिए मशीनीकृत सफाई, कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीक और सीएनजी व इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन ने हवा को शुद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रशासन की ओर से प्रदूषण के स्रोतों पर निरंतर की गई निगरानी और 'स्मार्ट सिटी' के तहत लागू किए गए उपायों से ही यह मुकाम हासिल हो सका है।
वर्ल्ड एमिशन नेटवर्क की रिपोर्ट और 'एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लेटर्स' में प्रकाशित शोध के अनुसार, वाराणसी का यह मॉडल अब अन्य प्रदूषित शहरों के लिए एक मिसाल बन गया है। शीर्ष 10 शहरों की सूची में उत्तर प्रदेश के मेरठ और गजरौला ने भी अपनी जगह बनाई है, लेकिन काशी 45 फीसदी सुधार के साथ सबसे आगे है।