वीडीए की ओर से लैंड पूलिंग नीति के तहत 10 एकड़ से कम भूमि देने वाले किसानों को विकसित भूमि का 30 प्रतिशत और 10 एकड़ से अधिक भूमि देने वाले किसानों को विकसित भूमि का 50 प्रतिशत वापस किया जाएगा। वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के अनुसार टाउनशिप विकसित करने के लिए जमीन मिल रही हैं। आनंद काशी (कल्लीपुर), रुद्र विहार (मढ़नी) और स्पोर्ट्स सिटी (गंजारी) में भूमि के लिए पूलिंग नीति अपनाई गई है। कल्लीपुर में 32 किसानों ने लगभग 27 एकड़ भूमि दी है, जबकि मढ़नी स्थित रुद्र विहार टाउनशिप में 33 किसानों ने 18 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। अब तक कुल 65 किसानों ने 45 एकड़ भूमि दी है।
वीडीए को उम्मीद है कि आगामी छह से आठ महीनों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकास कार्य पूरा कर किसानों को विकसित भूमि वापस कर दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि वाराणसी का विकास अब किसानों की सहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा, जहां विकास और समृद्धि दोनों साथ-साथ चलेंगे। वीडीए के अनुसार यह नीति किसानों को विकास प्रक्रिया का सहभागी बनाकर शहर के सुनियोजित विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। लैंड पूलिंग योजना के प्रारंभिक चरण में किसानों में इस नीति को लेकर कुछ संकोच था, लेकिन समय के साथ इसके लाभ समझने के बाद अब बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं।
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इस नीति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों की भूमि का भू-उपयोग स्वतः कृषि से आवासीय में परिवर्तित हो जाता है, जिससे उनकी भूमि का मूल्य कई गुना बढ़ जाता है। विकसित भूखंड की कीमत मूल कृषि भूमि की तुलना में काफी अधिक हो जाती है। अधिकारियों के अनुसार यह नीति भूमि अधिग्रहण के बजाय किसानों को विकास का भागीदार बनाती है, जिससे सरकार और किसानों दोनों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति बनती है।