रोपवे निर्माण के दौरान गिरिजाघर के पास चल रहे ध्वस्तीकरण के बाद जलकल की ओर से पाइपलाइनों की शिफ्टिंग शुरू होगी। इस दौरान शाही नाले से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
यहां निर्माण में सबसे बड़ी बाधा शाही नाला है। इसे देखते हुए कार्यदायी एजेंसी नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों ने स्विटजरलैंड की कंपनी के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। सड़क के बीचोबीच खोदाई करके शाही नाले की स्थिति देखी गई। निरीक्षण के बाद डिजाइन में परिवर्तन किया गया। अब पिलर नाले के बगल में बनाया जाएगा।
इसके लिए शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा वाले पार्क के पास ध्वस्तीकरण जारी है। जल्द ही यूटिलिटी शिफ्टिंग शुरू होगी। फिलहाल कैंट, काशी विद्यापीठ और गोदौलिया में रोप-वे स्टेशन से जुड़े निर्माण कराए जा रहे हैं। पहले चरण का काम मार्च 2025 तक पूरा किया जाना है।
गंडोला में रखा गया वेंटिलेशन का ध्यान
रोप-वे के गंडोला में सफर के दौरान तेज धूप का असर कम से कम होगा। इसकी डिजाइन में वेंटिलेशन का खास ख्याल रखा गया है। रोपवे बनने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन से विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट जाना आसान हो जाएगा। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है।