वाराणसी के केंद्रीय कारागार में रामलीला के छठवें दिन भरत मिलाप, सीता हरण, शबरी भक्ति और राम-सुग्रीव मित्रता सहित कई प्रसंगों का मंचन हुआ। भरत द्वारा राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटने और शबरी की भक्ति के प्रसंग ने त्याग, भाईचारे और समर्पण का संदेश दिया।
केंद्रीय कारागार वाराणसी में रामलीला मंचन के छठवें दिन भरत मिलाप, भगवान राम की वन यात्रा, शबरी भक्ति और सुग्रीव से मित्रता सहित विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। भरत मिलाप के प्रसंग ने दर्शकों का मन मोह लिया। रामलीला के माध्यम से त्याग, समर्पण, भाईचारे और भक्ति का संदेश दिया गया।
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रामलीला में दिखाया गया कि जब लक्ष्मण को भरत के सेना सहित आने की सूचना मिलती है, तो वे आशंकित होकर भगवान राम से भरत के इरादों पर सवाल उठाते हैं। इस पर भगवान राम भरत के प्रति अपना विश्वास जताते हुए कहते हैं कि भरत कभी राजमद में नहीं आ सकते।
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भरत के पहुंचने पर वे भगवान राम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने का आग्रह करते हैं। हालांकि, भगवान राम पिता के वचन का पालन करते हुए वनवास पूरा करने की बात कहते हैं। इसके बाद भरत भगवान राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट जाते हैं और उनकी ओर से राज्य का संचालन करने का संकल्प लेते हैं।
वाराणसी, केंद्रीय कारागार, रामलीला
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पंचवटी में शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, स्वर्ण मृग और सीता हरण का मंचन हुआ। जटायु-रावण युद्ध के बाद माता सीता की खोज करते हुए भगवान राम के शबरी आश्रम पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। शबरी के प्रेमपूर्वक दिए गए बेर ग्रहण कर भगवान राम ने सच्ची भक्ति और समर्पण का संदेश दिया।
आगे शबरी के मार्गदर्शन पर भगवान राम की सुग्रीव से मित्रता का मंचन किया गया। सुग्रीव ने भगवान राम को बाली के भय से छिपकर रहने की अपनी स्थिति बताई। इसी प्रसंग के साथ छठवें दिन की रामलीला का समापन हुआ।
इस अवसर पर केंद्रीय कारागार वाराणसी के वरिष्ठ अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, अयोध्या प्रसाद, भोजराज और श्रीमती अमिता श्रीवास सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।