बहन और भाई के बीच स्नेह का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। राखी की तैयारियों को लेकर रविवार को देर शाम तक बाजारों के साथ घरों में भी रौनक रही। एक ओर महिलाएं जहां घरों में मिठाइयां बनाने में व्यस्त थी। वहीं बहनों ने अपने हाथों में मेहंदी रचाई। राखी भाई बहनों के अटूट प्रेम का पर्व है। इसके लिए वो हर साल इंतजार करती हैं।
नए कपड़े, हाथों में मेहंदी रचाकर अपने भाइयों के हाथों पर रक्षासूत्र बांधती है। कोरोना के कारण बहनें बाहर तो नहीं जा पाईं, लेकिन घर में रहकर अपने हाथों में मेहंदी रचाई। तो कुछ ने अपने सजने संवरने के लिए घर पर फेशियल किया। वहीं कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई घरों में देसी मिठाइयां तैयार की गईं।
कहीं लड्डू बने, कहीं पेड़े तो कहीं बर्फी और छेने को मिठाइयों का रूप दिया गया। कुछ घर परिवारों में बेटियों और बहनों के आने का सिलसिला जारी रहा। रक्षाबंधन के लिए कई बहनें अपने मायके एक दिन पहले ही पहुंच गई।
संजय नगर कॉलोनी नाटी इमली निवासी सिमरन कौर बताती हैं कि कोरोना ने त्योहारों का रंग फीका कर दिया है, लेकिन हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं। इस बार होटल में जाकर बाहर नहीं खा सकते, इसके लिए मैंने घर पर ही स्पेशल डिश बनाने का सोचा है।
सिद्धगिरीबाग निवासी दीप्ति गुप्ता बताती हैं कि राखी मेरा फेवरेट त्योहार है। इसके लिए कई दिन पहले से ही मैं तैयारियों में जुट गई थी। मायका लखनऊ में है, इस बार तो वहां नहीं जा पा रही हूं। लेकिन सबसे पहले उठकर भाई को रक्षाबंधन विश करूंगी।
दशाश्वमेध निवासी ज्योति भाटिया बताती हैं, मैंने भाई के लिए अपने हाथों से रक्षा सूत्र और मोतियों से राखी तैयार की है। सुबह तैयार होकर सबसे पहले भाई को राखी बांधूंगी, लेकिन मुझसे सबसे ज्यादा उससे मिलने वाले तोहफे का इंतजार भी रहेगा।