अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पुलिस सिर्फ ढिंढोरा पीट रही है। इसकी गवाही खुद पुलिस के आंकड़े दे रहे हैं। वर्ष 2015 के बाद से अब तक एक भी नई गैंग जिले में पंजीकृत नहीं की गई है ।
जबकि इस दौरान अलग-अलग आपराधिक वारदातों में बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद उनके अंतरजनपदीय या फिर अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा खुद पुलिस अधिकारियों ने ही किया था। सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस ने पहले के पंजीकृत गिरोहों से इतर अंतरजनपदीय और अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय बदमाशों को दबोचा तो उनके गिरोह को पंजीकृत क्यों नहीं किया।
महीने भर पहले चौक डकैती की सनसनीखेज वारदात की छानबीन में भी पुलिस ने दावा किया था कि चिह्नित नौ बदमाशों ने नई गैंग बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों जिले के दौरे के दौरान पुलिस अधिकारियों को दो टूक कहा था कि अपराधियों की कुंडली खंगालें और कार्रवाई ऐसी हो कि उसका आमजन के बीच अच्छा संदेश जाए।
हकीकत यह है कि वर्ष 2015 के बाद जिले में बदमाशों की कोई गैंग पंजीकृत ही नहीं की गई। इस आधार पर मानें तो डेढ़ साल में बदमाशों का कोई गिरोह जिला पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। जिले में मौजूद समय में 33 गैंग पंजीकृत हैं। इन गिरोहों के सरगना और सदस्य के तौर पर 210 बदमाश चिह्नित हैं।
पुलिस रिकार्ड में जिले में टॉप थ्री में पहले स्थान पर सेंट्रल जेल में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह की अंतर प्रांतीय गैंग का नाम दर्ज है। बृजेश की गैंग में 10 सदस्य हैं। दूसरे स्थान पर बृजेश सिंह के धुरविरोधी धौरहरा निवासी बीकेडी उर्फ इंद्रदेव सिंह की गैंग का नाम दर्ज है।
बीकेडी का गिरोह 11 सदस्यों का है। वहीं, तीसरे स्थान पर कोतवाली के कपिलेश्वर गली निवासी विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली के गिरोह का नाम दर्ज है। नेपाली की गैंग में 24 सदस्य हैं।