छोटी-छोटी समस्याओं और शिकायतों के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद नौकरशाही के टरकाऊ रवैये से हताश और निराश लोगों की उम्मीदें अब अपने सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बढ़ गई हैं। केंद्र के बाद प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद यह भरोसा और गहरा हो रहा है।
रवींद्रपुरी स्थित पीएम मोदी के संसदीय कार्यालय में दिनोंदिन बढ़ती शिकायतों की संख्या इसका प्रमाण है। सबको लगता है कि अब उन्हें अफसरों की जी-हजूरी ज्यादा नहीं करनी पड़ेगी। पीएम के यहां शिकायत पहुंचते ही उनकी समस्या का समाधान अवश्य होगा।
संसदीय कार्यालय में पहले जहां महीने में 700-800 शिकायतें आती थीं। अब इनकी 2100 से 2300 तक हो गई हैं। सामान्यत: हर दिन 40 से 50 शिकायतें आती हैं। शनिवार को जब केंद्रीय मंत्री होते हैं तो उस दौरान 250 से 350 शिकायतें आती हैं।
इन शिकायतों को विभागवार विभागाध्यक्षों को भेजा जाता है। वहां से शिकायतों के निस्तारण की रिपोर्ट न केवल कार्यालय बल्कि शिकायतकर्ता को भी भेजी जाती है।
ज्यादातर शिकायतें बिजली, पानी, सड़क, सीवर, पेंशन, छात्रवृत्ति, मृतक आश्रितों को नौकरी, स्थानांतरण, कालेजों और स्कूलों में प्रवेश, भ्रष्टाचार की जांच कराने, कब्जा हटाने, गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए अनुदान आदि से जुड़ी होती हैं। शिकायतों को छांटकर यथास्थान भेज दिया जाता है।
पहले जब जनता अफसरों के यहां शिकायत करती थी तो उन्हें प्रगति के बारे में बार-बार अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। संसदीय कार्यालय में शिकायत के बाद विभागीय अधिकारी फोन कर शिकायतकर्ता से पूछते हैं कि आपने जो पीएम के यहां शिकायत की थी उसका समाधान हुआ या नहीं।
सपा के कार्यकाल में यहां से जो शिकायतें राज्य सरकारों से जुड़े विभागों में भेजी जाती थीं, निस्तारण की प्रक्रिया काफी धीमी रहती थी।
वाराणसी संसदीय क्षेत्र के कैंट, उत्तरी, दक्षिणी, रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के लोगों की तकलीफें दूर करने के लिए 20 अगस्त, 2014 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पीएम मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय का उद्घाटन किया था।