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बनारस के बैंकों पर भी शक की सुई

Tue, 13 Dec 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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एटीएम पर घंटों लाइन लगाने के बाद भी लोगों को नहीं मिल पा रहा कैश।
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नोटबंदी के बाद करेंसी की बंदरबांट से वाराणसी अछूता नहीं है। करीब एक महीने में बैंकों के लेन-देन के सामने आए आंकड़े और देश के कई भागों में नए नोटों की बरामदगी के बाद वाराणसी क्षेत्र के बैंक भी शक के दायरे में आ गए हैं। कहा जा रहा है कि यहां 500-1000 रुपये के पुराने नोटों की अदला-बदली, इन्हें जमा करने से लेकर नए नोट देने में गोलमाल अब भी हो रहा है। कुछ बैंकों ने ग्राहकों की सुविधा के नाम पर भविष्य में नए नोटों के संकट के अंदेशे में भी करेंसी दबा रखी है। यही वजह है कि हर दिन हजारों लोग एटीएम पर लाइन में लगने के बाद भी दो-ढाई हजार रुपये नहीं पा रहे हैं। चेक के जरिए भी नियमानुसार भुगतान सबको नसीब नहीं हो पाता है।


 सूत्रों की मानें तो नोटबंदी की घोषणा के बाद आरबीआई की ओर से अब तक 3000 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं जबकि बैंकों ने 34 दिन में केवल 3300 करोड़ रुपये बांटे हैं। जाहिर है कि 300 करोड़ रुपये बैंकों की करेंसी चेस्ट में पहले से था और उसे बांट दिया गया। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या नोटबंदी के बाद जमा होने वाले सारे के सारे नोट क्या 500-1000 रुपये के ही थे? जानकार बताते हैं कि नोटबंदी की आड़ में बैंक के अफसर-कर्मचारी काली कमाई के लिए काले धन वालों की मदद में जुट गए। रसूखदार लोगों को          उनके 500-1000 रुपये के बदले छोटे-छोटे नोट दिए गए। नई करेंसी आने के बाद भी यह काम किया जा रहा है। इसके बदले में बैंकवालों  की 10 से 25 फीसदी तक की कमाई हो रही है।
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बैंक से जुड़े कुछ अधिकारियों की मानें तो आरबीआई की ओर से नोटों के वितरण में नियमों की अनदेखी की गई है। निजी बैंक और सरकारी बैंकों को बराबर पैसा दिया गया है। इसके चलते बैंकों में भ्रष्टाचार होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह काम शुरुआती दिनों में तेजी से हुआ है। यही नहीं, आरबीआई ने जो रुपये भेजे हैं, उनमें एक तिहाई पुराने नोट हैं। बाकी बचे 2000 के अधिक और 500 के नए नोट कम आए हैं। नोटबंदी के बाद बैंकों के चेस्ट में पड़े नोटों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा स्वायल नोटों को भी इसी दौरान खपा दिया गया। आरबीआई की ओर से जो पुराने नोट आए थे, उन्हें बांट दिया गया। नए नोटों में से एक बड़ा हिस्सा एटीएम में डाला गया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में नोटबंदी के बाद के हालात पर नजर लगातार रखी जा रही है। इसके लिए वित्त मंत्रालय (एफएम), प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) के कुछ अधिकारियों ने यहां डेरा जमा रखा है। वे अलग-अलग बैंकों की कतार में खड़े होकर जनता की तकलीफों को समझ रहे हैं। बाद में बैंक में चक्कर भी लगाते हैं। फिलहाल, इन एजेंसियों को कार्रवाई करने से मना किया गया है। भाजपा सूत्रों की मानें तो जनता को हो रही तकलीफ के लिए बैंक जिम्मेदार हैं। उन्हें जितना पैसा भेजा गया है, उसे सही तरीके से बांटा नहीं है। कुछ बैंक वालों ने कालाधन को सफेद करने में सहयोग किया है। इस बारे में जब प्रधानमंत्री को जानकारी दी गई तो उनके निर्देश पर यहां के हालात पर नजर रखने के लिए स्पेशल टीम भेजी गई है।


तीन दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को बैंक खुलेंगे। कैश की जबरदस्त किल्लत के चलते बैंकों पर भीड़ का दबाव बढ़ सकता है। बता दें कि शनिवार और रविवार के बाद सोमवार को ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी की वजह से बैंक बंद रहे। इस दौरान एटीएम सेवा भी लड़खड़ाई रही। बैंकों के खुलने के बाद मंगलवार से एटीएम सेवा में भी कुछ सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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आयकर विभाग ऐसे लोगों की सूची बना रहा है, जिनके पास अघोषित संपत्ति और उन्होंने अब तक इस छिपाया हुआ है। जल्दी ही इन पर कार्रवाई हो सकती है। आयकर विभाग बैंकों में 10 नवंबर के बाद खातों में      जमा होने वाले धन के बारे में जानकारी कर रहा है। नोटबंद के बाद बनारस समेत आसपास के जिलों में बैक डोर से कमीशन के चक्कर में पुराने नोट बदलने के मामले सामने आने के बाद विभाग ने बड़े कारोबारियों, बड़े खाताधारकों के खातों की जांच कराने का निर्णय लिया है। विभाग के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक कुछ लोग चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि और कई के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।  नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से अब तक एसबीआई, पीएनबी, यूबीआई, ग्रामीण बैंक सहित अन्य बैंकों और डाकघरों में पांच हजार करोड़ से अधिक की राशि जमा हुई है। नए खाते भी खुलवाने वालों की संख्या बढ़ी है। बनारस, भदोही सहित आसपास के जिलों के डाकघरों में ही पांच हजार खाते खोले जा चुके हैं।
 
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