ललित ने अपने एक्स पर यह भी लिखा है कि उनकी यात्रा एक छोटे से गांव से शुरू हुई, जहाँ सीमित संसाधन थे, लेकिन सपने असीम थे। एक स्टिंग ऑपरेशन का सामना करने से लेकर ओलंपिक पोडियम पर खड़े होने तक - एक बार नहीं, बल्कि दो बार - यह चुनौतियों, विकास और अविस्मरणीय गौरव से भरा रास्ता रहा है।
यह भी बताया है कि 26 साल बाद अपने शहर से ओलंपियन बनना कुछ ऐसा है जिसे मैं हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ अपने साथ रखूँगा। ललित ने अपने अब तक के सफर में कोच परमानंद के साथ ही हरिंदर, समीर, धनराज आदि को मार्गदर्शक बताया है। साथ ही हरमनप्रीत सिंह को भी याद किया है।