उन्होंने हिंदी में सदैव आंचलिक बोलियों को महत्व दिया। बीएचयू के गोपबंधु मिश्र ने पंडित जी को एक युग बताते हुए कहा कि ललित निबंध विधा को उन्होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारतीय संस्कृति और लोक-जीवन को अपनी लेखनी से समृद्ध किया। भाषा-साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया और समकालीन साहित्य पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
अध्यक्षता करते हुए अनंत मिश्रा ने कहा कि पं. विद्या निवास मिश्र का साहित्य एक तीर्थ की तरह है, जो परंपरा और आधुनिकता, लोक और शास्त्र के बीच सेतु बनाता है। रांची से आए मयंक मुरारी, प्रयागराज के श्रीप्रकाश मिश्रा, सुशील कुमार पांडेय, बलराज पांडेय, केके सिंह, प्रो. दिलीप सिंह आदि ने विचार रखे।
पारिजात : पंडित विद्यानिवास मिश्र का हुआ लोकार्पण
संगोष्ठी में पं. विद्या निवास मिश्र पर केंद्रित नीरजा माधव की पुस्तक शब्द पारिजात : पंडित विद्यानिवास मिश्र का लोकार्पण किया गया है। उन्होंने पुस्तक में मिश्रजी के निबंधों के बहुआयामी संसार के बारे में और प्रकृति, लोकतत्व, बौद्धिकता, सर्जनात्मकता, कल्पनाशीलता, काव्यात्मकता, रम्य रचनात्मकता, भाषा की उर्वर सृजनात्मकता, सम्प्रेषणीयता पर बात की। हिंदी की शब्द संपदा, हिंदी और हम, हिंदीमय जीवन और प्रौढ़ों का शब्द संसार जैसी उनकी पुस्तकों ने हिंदी के दायरे के बारे में बताया।