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Varanasi News: यूनेस्को ने अधिकारियों से पूछा- विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया तो कैसे पूरे होंगे मानक

Sun, 28 Sep 2025 03:00 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

यूनेस्को की टीम ने वाराणसी में सारनाथ का निरीक्षण किया। विश्व धरोहर सूची में शामिल करने को लेकर भी सवाल किए। टीम ने धमेख स्तूप पर पहुंचकर स्तूप के इतिहास व उस पर बनी कलाकृतियों को देखा।
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सारनाथ में जानकारी लेते यूनेस्को के अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sarnath Varanasi: तथागत की उपदेश स्थली को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने में पुरातत्व विभाग की लापरवाही भारी पड़ सकती है। शनिवार को यूनेस्को की टीम ने भी धमेख स्तूप पर पड़े काले धब्बों का देखा।

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पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा ने पूछा कि अगर सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर दिया जाए तो आप लोग हेरिटेज जोन के मानक कैसे पूरा करेंगे? रेड जोन क्षेत्र में इतने सारे निर्माण हो चुके हैं। इस पर पुरातत्व अधिकारी ने कहा कि इसके लिए पहले से ही पुरातत्व नियमों का पालन किया जा रहा है। संरक्षित क्षेत्र के 300 मीटर दायरे में किसी भी निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर प्रशासन अनुमति देता है।

पुरातत्व के मानचित्र के आधार पर धर्मराजिका स्तूप व पास में महाविहार जाने के लिए पत्थर को तराशकर बनाई गई सीढ़ी की विशेषता एवं उसके इतिहास के बारे में नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट के प्रो. बीआर मणि ने विस्तार से जानकारी दी। 

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मानचित्र से संरक्षित क्षेत्र की ली जानकारी
यूनेस्को टीम के पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा ने पुरातत्व खंडहर परिसर में लगी छायाचित्र प्रदर्शनी में बैठकर गूगल मैप व पुरातत्व विभाग के स्मारकों के आसपास के मानचित्र को देख कर संरक्षित क्षेत्र में बने निर्माण की जानकारी ली। मानचित्र में दिख रही खाली जगहों के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली। 

प्राचीन मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के अवशेष से जुड़े भगवान बुद्ध के वर्षा काल में बिताए जीवन व ध्यान के बारे में बीआर मणि ने बताते हुए कहा कि समय-समय पर स्मारकों को संरक्षित करने के लिए विभाग द्वारा संरक्षण कार्य किया जाता है। 

इसके बाद मंदिर के बाहर पत्थर पर बनी आकृति को देखकर हबीब रजा ने कहा कि ऐसी आकृति अनेक पुरावशेषों पर देखने को मिलती है। इसके बाद अशोक की लाट पर लिखी ब्राह्मी लिपि का बारीकी से अवलोकन कर फोटोग्राफी की। सीधे धमेख स्तूप पर पहुंचकर स्तूप के इतिहास व उस पर बनी कलाकृतियों को देखा।
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