मानचित्र से संरक्षित क्षेत्र की ली जानकारी
यूनेस्को टीम के पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा ने पुरातत्व खंडहर परिसर में लगी छायाचित्र प्रदर्शनी में बैठकर गूगल मैप व पुरातत्व विभाग के स्मारकों के आसपास के मानचित्र को देख कर संरक्षित क्षेत्र में बने निर्माण की जानकारी ली। मानचित्र में दिख रही खाली जगहों के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली।
प्राचीन मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के अवशेष से जुड़े भगवान बुद्ध के वर्षा काल में बिताए जीवन व ध्यान के बारे में बीआर मणि ने बताते हुए कहा कि समय-समय पर स्मारकों को संरक्षित करने के लिए विभाग द्वारा संरक्षण कार्य किया जाता है।
इसके बाद मंदिर के बाहर पत्थर पर बनी आकृति को देखकर हबीब रजा ने कहा कि ऐसी आकृति अनेक पुरावशेषों पर देखने को मिलती है। इसके बाद अशोक की लाट पर लिखी ब्राह्मी लिपि का बारीकी से अवलोकन कर फोटोग्राफी की। सीधे धमेख स्तूप पर पहुंचकर स्तूप के इतिहास व उस पर बनी कलाकृतियों को देखा।