मुख्य आयोजक सचिव डॉ. अशोक राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वाराणसी में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए हर घर पेड़ योजना शुरू करने के लिए आह्वान किया। तकनीकी सत्रों में चर्चा के दौरान विशेषज्ञों में डॉ. एनके सुब्रमण्यम, डॉ. एस नागभूषण नेबताया कि भारत में विभिन्न अध्ययनो के अनुसार 10-15 प्रतिशत बच्चों में दमा पाया गया।
विश्वस्तर पर भी एक मेटा अनालसिस में 10-20 प्रतिशत बच्चों में दमा पाया गया। वायु प्रदूषण, तंबाकू का धुंआ, धूल, एलर्जी तथा वायरल संक्रमण प्रमुख कारक होते हैं। बार बार खांसी, विशेषकर रात में या दौड़ने पर खाँसी आना भी दमा का लक्षण हो सकता है। कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं और उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
डॉ. जयंत जोशी ने बताया कि वायु प्रदूषण आज बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी पर्यावरणीय खतरों में से एक है। इस दौरान आयोजक सचिव डॉ. डीएम गुप्ता, संचालन आयोजक सचिव डॉ. आलोक सी भारद्वाज ने किया।