विभागीय स्तर पर किया जा रहा जागरूक करने का काम।
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जुलाई महीने में 7 से 12 जुलाई तक कुल छह दिन लगन थी। शहर में छह दिनों में हजारों की संख्या में विवाह भी हुए हैं। लेकिन अभी तक किसी ने भी जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में शादी में मिले उपहारों की सूची जमा नही कराई है जबकि हाल ही में दहेज प्रतिषेध नियमावली 1999 के तहत इसे अनिवार्य कर दिया गया था।
सूची ने मिलने से जिला प्रोबेशन अधिकारी भी इसे लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस नियम के अधिक प्रचार प्रसार की जरूरत है। गेस्ट हाउस, बरात घर से संपर्क किया जा रहा है, उनके माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
अनिवार्य हो गया है उपहारों की सूची देना
वर्ष 1999 में वैसे तो यह नियम बन गया था लेकिन इसका पालन अब कराने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में कोर्ट ने भी कहा है कि अगर भविष्य में दहेज को लेकर मुकदमा दर्ज कराया जाता है तो उसे विवाह में वर वधू पक्ष से दिए गए उपहारों की सूची दिखानी होगी।
इसी के चलते विवाह के बाद सूची को जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा करने का आदेश दिया गया है। देखा जाए तो सीजन में ज्यादातर शादियां मैरिज हॉल, बैंक्वेट हॉल, गेस्ट हाउस से होती हैं। जिसके चलते वहां भी दीवारों पर सूचना अंकित करनी है। लेकिन अभी तक यह सूचना अंकित नहीं हो पाई है। जिसके चलते लोगों को इस नियम के बारे में जानकारी ही नहीं है।
बोले अधिकारी
दहेज प्रतिषेध नियमावली 1999 के तहत शादी के बाद उपहारों की सूची जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में देनी होती है, लेकिन पिछले दिनों हुई शादी की सूची अभी तक नहीं आई है। मैरिज हॉल, बैंक्वेट हॉल, गेस्ट हाउस वालों से संपर्क किया जा रहा है, लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- सुधाकर शरण पांडेय, जिला प्रोबेशन अधिकारी, वाराणसी