इन्होंने भी सुनाईं शायरियां
- कवि वशिष्ठ अनूप : परख इंसान की होती है अक्सर दो ही मौके पर, कहीं छोड़ी नहीं खुद्दारी, कहीं झुकना नहीं छोड़ा।
- शायर मनीष बादल : जो था पहला गुल खिला, बस वो खिला है आज तक, बस तभी से शायरी का सिलसिला है आज तक।
- युवा शायर अंकित मौर्य : कोई सवाल जिंदगी का हल नहीं हुआ, पढ़ने में सारी उम्र गंवाने के बावजूद।
- डॉ. विनम्र सेन सिंह : नई डगर नया सफर चुनते हैं, चलते हैं रोज।