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Varanasi News: भोजपुरी ही नहीं हिंदी साहित्य को भी पं. हरिराम ने किया समृद्ध, दो साहित्यकारों का हुआ सम्मान

Thu, 13 Mar 2025 11:17 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी में हिंदी और भोजपुरी के रचनाकार पं. हरिराम द्विवेदी की जयंती मनाई गई। साहित्यकारों ने उनको नमन किया। कहा कि उन्होंने लोक संस्कृति को नवीन ऊंचाई प्रदान की। 
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विस्तार
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काशी की आन, बान और शान रहे हिंदी और भोजपुरी के अप्रतिम रचनाकार पं. हरिराम द्विवेदी की जयंती पर बुधवार को उनका स्मरण किया गया। पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी साहित्य शोध न्यास की ओर से महमूरगंज स्थित मोतीझील परिसर में समारोह का आयोजन किया गया। 

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मुख्य अतिथि बसंत कन्या महाविद्यालय में संगीत की शिक्षिका प्रो. मीनू पाठक रहीं। समारोह की अध्यक्षता गीतकार पं. सूर्य कुमार मिश्र ने की। सारस्वत अतिथि एनसीएल के पर्यावरण सलाहकार मनमोहन मिश्र रहे। विशिष्ट अतिथि महेंद्र तिवारी, गिरीश पांडेय एवं मोतीझील के अधिष्ठाता अशोक गुप्त रहे।

आयोजन के पहले सत्र में दो वरिष्ठ साहित्यकारों कवि मनमोहन मिश्र एवं गीतकार अरविंद मिश्र हर्ष को पं. हरिराम द्विवेदी साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। न्यास से जुड़े अशोक गुप्त, रामानंद तिवारी सहित अतिथियों ने दोनों साहित्यकारों को सम्मान स्वरूप मानपत्र और अंगवस्त्रम भेंट किया। 

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लोक संस्कृति को दी नवीन ऊंचाई: सूर्य कुमार
सम्मान समारोह के बाद चर्चा सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. मीनू पाठक ने कहा कि पं.हरिराम द्विवेदी ने अपने कृतित्व से न सिर्फ भोजपुरी बल्कि हिंदी साहित्य को भी समृद्ध किया है। उनके लिखे गीत गा-गा कर न जाने कितने लोग गायक बन गए। उन्होंने कभी भी किसी भी कलाकार से गीतों के एवज में धन की मांग नहीं की। 

पं. हरिराम द्विवेदी भौतिक रूप से निसंदेह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यशकाया सदैव इस संसार में विद्यमान रहेगी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ गीतकार पं. सूर्यकुमार मिश्र ने कहा कि हरि भैया जमीन से जुड़े एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने लोक संस्कृति को नवीन ऊंचाई प्रदान की। 

सारस्वत अतिथि एनसीएल के पर्यावरण सलाहकार मनमोहन मिश्र ने कहा कि हरि भैया जितनी सहजता और सरलता से कविताओं में अपनी बात कहते थे वह व्यवहारिक जीवन में भी उतने ही सरल और सहज थे। चर्चा सत्र के बाद काव्यपाठ का आयोजन हुआ। इसमें नगर के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने काव्यपाठ किया। 

इनमें डॉ. मंजरी पांडेय, गिरीश पांडेय, प्रतापशंकर दुबे, रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज’, प्रियंका सिंह, अनामिका पाठक, गौतम अरोड़ा ‘सरस’, राजेश द्विवेदी, दुर्गेश उपाध्याय शामिल रहे। संचालन डॉ. नागेश शांडिल्य, स्वागत न्यास के अध्यक्ष रामानंद तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन पं. अरुण द्विवेदी ने किया।
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पंडित हरिराम द्विवेदी को मिले पद्म सम्मान
ख्यातिलब्ध साहित्यकार पंडित हरिराम द्विवेदी की 89वीं जन्म जयंती बुधवार को मनाई गई। जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पं. हरिराम द्विवेदी को पद्म पुरस्कार मिलना चाहिए। उनकी रचनाएं समाज को आइना दिखाने का काम करती थीं। 

उन्होंने कहा कि वह भोजपुरी के साथ-साथ हिंदी साहित्य के एक ऐसे साहित्यकार थे जो लिखते थे उसी को मन से जीते भी थे। आकाशवाणी में उनकी आवाज पूरे देश को मोहित करती थी। उनकी रचनाएं और उनकी वाणी उनको अजर अमर रखेंगी। पं. हरिराम द्विवेदी हरि भैया बहुत ही सरल और दिल के साफ थे।
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