लोक संस्कृति को दी नवीन ऊंचाई: सूर्य कुमार
सम्मान समारोह के बाद चर्चा सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. मीनू पाठक ने कहा कि पं.हरिराम द्विवेदी ने अपने कृतित्व से न सिर्फ भोजपुरी बल्कि हिंदी साहित्य को भी समृद्ध किया है। उनके लिखे गीत गा-गा कर न जाने कितने लोग गायक बन गए। उन्होंने कभी भी किसी भी कलाकार से गीतों के एवज में धन की मांग नहीं की।
पं. हरिराम द्विवेदी भौतिक रूप से निसंदेह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यशकाया सदैव इस संसार में विद्यमान रहेगी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ गीतकार पं. सूर्यकुमार मिश्र ने कहा कि हरि भैया जमीन से जुड़े एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने लोक संस्कृति को नवीन ऊंचाई प्रदान की।
सारस्वत अतिथि एनसीएल के पर्यावरण सलाहकार मनमोहन मिश्र ने कहा कि हरि भैया जितनी सहजता और सरलता से कविताओं में अपनी बात कहते थे वह व्यवहारिक जीवन में भी उतने ही सरल और सहज थे। चर्चा सत्र के बाद काव्यपाठ का आयोजन हुआ। इसमें नगर के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने काव्यपाठ किया।
इनमें डॉ. मंजरी पांडेय, गिरीश पांडेय, प्रतापशंकर दुबे, रुद्रनाथ त्रिपाठी ‘पुंज’, प्रियंका सिंह, अनामिका पाठक, गौतम अरोड़ा ‘सरस’, राजेश द्विवेदी, दुर्गेश उपाध्याय शामिल रहे। संचालन डॉ. नागेश शांडिल्य, स्वागत न्यास के अध्यक्ष रामानंद तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन पं. अरुण द्विवेदी ने किया।
पंडित हरिराम द्विवेदी को मिले पद्म सम्मान
ख्यातिलब्ध साहित्यकार पंडित हरिराम द्विवेदी की 89वीं जन्म जयंती बुधवार को मनाई गई। जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पं. हरिराम द्विवेदी को पद्म पुरस्कार मिलना चाहिए। उनकी रचनाएं समाज को आइना दिखाने का काम करती थीं।
उन्होंने कहा कि वह भोजपुरी के साथ-साथ हिंदी साहित्य के एक ऐसे साहित्यकार थे जो लिखते थे उसी को मन से जीते भी थे। आकाशवाणी में उनकी आवाज पूरे देश को मोहित करती थी। उनकी रचनाएं और उनकी वाणी उनको अजर अमर रखेंगी। पं. हरिराम द्विवेदी हरि भैया बहुत ही सरल और दिल के साफ थे।