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Varanasi News: लोकगीत और झिझिया नृत्य से हुआ मिथिला के नए साल का शंखनाद, भारतेंदु भवन में मना जुड़शीतल

Mon, 14 Apr 2025 06:37 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

मिथिला नववर्ष अभिनंदन समारोह के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकारों ने अपने-अपने प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। शहर के विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रम हुए।
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भारतेंदु भवन में आयोजित नववर्ष अभिनंदन समारोह में नृत्य प्रस्तुत करतीं कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैथिल समाज की ओर से चौखंभा स्थित भारतेंदु भवन में मिथिला नववर्ष की पूर्व संध्या पर नववर्ष अभिनंदन समारोह (जुड़शीतल) का आयोजन किया गया। मिथिला के लोकनृत्य और संगीत से मिथिला नववर्ष का शंखनाद किया गया। अतिथियों ने मिथिला संस्कृति के प्रतीक कवि कोकिल विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया।

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मिथिला नववर्ष अभिनंदन समारोह में लोकनृत्य झिझिया नृत्य की प्रस्तुति हुई। भीषण गर्मी में भगवान इंद्र को खुश करने के लिए मनोहारी झिझिया, जट जटीन, समाचकैबा, लोकमहापर्व डाला छठ, जय जय भैरवी, गणेश वंदना की मनोहारी प्रस्तुति हुई। 

अमित श्रीवास्तव ने जटायु सद्गति में रावण और जटायु के युद्ध की संगीतमय प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आम मैथिल जनमानस को समर्पित पाॅकेट मिथिला पंचांग में मिथिला के पर्व, त्योहार, लगन, विवाह, द्विरागमन, जनेऊ, मुंडन, गृहप्रवेश आदि तिथियों को दर्शाया गया है। 
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संचालन गौतम कुमार झा और सहसंयोजन मालिनी चौधरी ने किया। स्वागत दीपेश चंद चौधरी व धन्यवाद निरसन कुमार झा (एडवोकेट) ने किया। इस दौरान डाॅ. दिनेश पांडेय, नित्यानंद राय, अजय विक्रम आदि माैजूद रहे। 

जटायु सद्गति की भावपूर्ण प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला
बासी पानी डालकर देते हैं आशीर्वाद
विशिष्ट अतिथि बनारस बार एसोसिएशन के महामंत्री शशांक श्रीवास्तव ने कहा की जुड़शीतल का प्रकृति से सीधा संबंध है। इस मौके पर बड़े बुजुर्ग अपने से छोटे लोगों के सिर पर बासी पानी डालकर आशीर्वाद देते हैं। 

प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देते हैं जुड़शीतल जैसे त्योहार
समारोह की अध्यक्षता कर रहे बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश तिवारी ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में आधुनिकीकरण के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती जा रही है। ऐसे में पर्यावरण को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। जुड़शीतल का पर्व मुख्य रूप से प्रकृति से जुड़ा हुआ है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ते खतरे के बीच जुड़शीतल जैसे त्योहार हमें प्रकृति के प्रति प्रेम, सद्धाव और प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देते हैं। 

साक्षात वेद से आई है श्रौत परंपरा
महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि श्रौत की परंपरा साक्षात वेद से आई है जो प्राणिमात्र के लिए कल्याणकारी है। वह रविवार को संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रौत गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 

सारस्वत अतिथि बीएचयू के प्रो. श्रीकिशोर मिश्र ने बताया कि आचार्य भगवत प्रसाद मिश्र ने काशी के विद्वानों के आग्रह पर इस श्राैत परंपरा को जीवित किया गया। अध्यक्षता कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। संचालन डॉ. विजय शर्मा ने किया। इस दौरान प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. अमित शुक्ल, प्रो. कमलाकांत त्रिपाठी मौजूद रहे। 

कांची कामकोटिश्वर मंदिर में पांच घंटे तक चला शास्त्रार्थ
कांची कामकोटिश्वर मंदिर में विरक्त संत स्वामी कृष्णानंद सरस्वती (नारायण) स्वामी की स्मृति में पांच घंटे शास्त्रार्थ का आयोजन हुआ। इसके साथ ही संत के नाम पर गोष्ठी और उनके तपस्वी जीवन व धर्म कार्य पर पुस्तक प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया। 

कृष्णानंद सरस्वती (नारायण) स्वामी महाराज की स्मृति में हनुमान घाट स्थित कांची कामकोटिश्वर मंदिर में श्रद्धांजलि सभा हुई। पांच घंटे तक संतों, विद्वानों और वेद पाठियों ने शास्त्रार्थ किया। अध्यक्षता यति अमृतानंद सरस्वती ने की। सभा में बिल्वेश शास्त्री, ईश्वर घनपाठी, वीएस. सुब्रमण्यम, विनय शंकर, दिव्य स्वरूप ब्रह्मचारी, वी. चंद्रशेखर द्राविड़ मौजूद रहे। 

कसेरा समाज ने किया मां विंध्यवासिनी का विशेष शृंगार
कसेरा समाज के मां विंध्यवासिनी शृंगार समिति की ओर से काशीपुरा स्थित मां विंध्यवासिनी का शृंगार हुआ। कसेरा समाज के हर घर से मां की शृंगार संबंधित सामग्री थाल सजाई गई। इसके बाद काशीपुरा से बधावा शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा मां के धाम विंध्याचल मंदिर पहुंची। 

बधावा यात्रा में लगभग 200 थाल लिए कसेरा समाज के बच्चे, बूढ़े और महिलाएं शामिल रहीं। भक्तों में मां का प्रसाद हलवा और पेड़ा वितरित किया गया। देर रात मां की आरती उतारी गई। मुख्य अतिथि आयुष मंत्री डाॅ. दयाशंकर मिश्र दयालु और विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी रहे। अध्यक्ष रामजी कसेरा, घनश्याम, विनोद, अशोक, बुद्धलाल, मुकेश आदि माैजूद रहे। 
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स्वयंभू नृसिंह भगवान को सुनाई सुंदरकांड की चौपाई
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा पर प्रह्लादघाट स्थित नृसिंह मंदिर में मानस के पंचम सोपान पर सुंदरकांड का पाठ हुआ। मंदिर प्रबंधन की ओर से स्वयंभू भगवान श्री नृसिंह सहित पवनपुत्र हनुमान जी के विग्रह का मनोहारी शृंगार किया गया। नृसिंह भगवान को पीले रंग की धोती और हनुमान जी को लाल रंग की धोती धारण कराई गई। 

भक्त प्रहलाद के दर्शन से अगाध श्रद्धा और भक्तिभाव प्रगाढ़ होता नजर आया। श्री लाटभैरव भजन मंडल के कलाकारों ने सुंदरकांड का संगीतमय पाठ किया। पाठ की पूर्णाहुति होते ही हरि भजनों के भक्तिमय स्वर से सभी झंकृत हो उठे। भव्य आरती उतारी गई। इस दौरान रमेश तिवारी, केवल कुशवाहा, गोविंद, धर्मेंद्र शाह, शिवम अग्रहरि आदि रहे। 
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