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Varanasi News: माॅडल सराफा बाजार बने तो समस्याओं से मिले निजात, सुविधाएं नहीं होने से परेशानी

Sun, 12 Oct 2025 05:40 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

यहां के दुकानदारों का कहना है कि सराफा मंडी के विकास को लेकर वर्षों से आश्वासन मिलते रहे, पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। पार्किंग की सुविधा न होने के कारण गलियों में गाड़ियां खड़ी होती हैं। जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
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सराफा बाजार में तारों का जंजाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वांचल का सबसे बड़ा सराफा बाजार बदहाली का शिकार होता जा रहा है। महीने में 300 करोड़ का सोने और चांदी का कारोबार करने वाला यह जगह आज अव्यवस्थाओं, जाम और सुरक्षा की कमी से जूझ रहा है। 

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इस बाजार से हजारों लोगों की आजीविका तो चल रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं।करीब 100 साल पहले बसे इस बाजार में आज 1000 से अधिक छोटे, बड़े और मध्यम दुकानदार हैं। रेशम कटरा, ठठेरी बाजार, चौक और सुड़िया से लेकर गोविंदपुरा तक फैले इस क्षेत्र में करीब 10 हजार से अधिक लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। 

हर दिन सैकड़ों ग्राहक सोना-चांदी की खरीदारी करने यहां आते हैं, लेकिन यहां की तंग गलियां, तारों के उलझे जाल और पार्किंग की कमी, शौचालय का अभाव व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है।

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बोले व्यापारी और आमजन

सराफा बाजार की समस्याएं काफी पुरानी हैं। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने पर भी इनका समाधान नहीं हुआ। संकरी गलियों में बसा यह बाजार प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। पार्किंग आदि की समस्याओं के चलते बाजार से दूर दराज के ग्राहक कम हो गए हैं। - रवि सराफ, अध्यक्ष, काशी सराफा मंडल।

प्रशासन अगर चाह ले तो सराफा बाजार को मॉडल मार्केट के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां न केवल पूर्वांचल बल्कि बिहार और झारखंड से भी ग्राहक आते हैं। ऐसे में अगर तारों के जंजाल को भूमिगत किया जाए, सड़कों को चौड़ा किया जाए और पार्किंग व सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जाएं तो बाजार की सूरत बदल सकती है। - किशोर सेठ, महामंत्री, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ। 

ठठेरी बाजार में 4 शौचालय बने थे, लेकिन रखरखाव के अभाव में अब वहां कोई नहीं जाता। यहां की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। गाड़ियों को खड़ी करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। - पंकज सराफ पम्पी, उपाध्यक्ष, वाराणसी सराफा एसोसिएशन। 

बाजार में तारों का जंजाल इस तरह फैला हुआ है कि लगता है 15 साल पहले के बनारस में आ गए हों। विद्युत विभाग, इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों ने पूरे बाजार में तारों का जाल फैलाया है। यहां सफाई व्यवस्था भी न के बराबर है। - कमल कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ। 

आजादी के करीब 25 वर्ष पहले इस बाजार की स्थापना हुई थी। तब से अब तक दुकानों की संख्या में काफी वृद्धि हुई, लेकिन शासन या प्रशासन के ओर से यहां के विकास पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। - आकाश सर्राफ, व्यापारी।

सराफा बाजार से एक किमी दूर टाउनहाॅल में गाड़ियों की पार्किंग बनाई गई है। पूर्वांचल के अन्य जिलों से आने वाले लोग पैदल ही सराफा बाजार तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। - जतिन रस्तोगी, व्यापारी। 

प्रशासन के ओर से सराफा बाजार पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि सोने और चांदी से महीने में 300 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। अधिकारी कभी व्यापारियों की सुधि लेने भी नहीं आते। - राजेश खन्ना, व्यापारी। 

धनतेरस पर बाजार में हर साल भीड़ उमड़ती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां से व्यापारियों की संख्या में काफी कमी आई है। कई व्यापारी अब बनारस आने के बजाय आगरा और मथुरा की ओर बढ़ने लगे हैं। - अविनाश सेठ, जिलाध्यक्ष, ऑल इंडिया स्वर्णकार समाज।
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सड़क किनारे लगा कूड़े का अंबार
सिगरा से महमूरगंज जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे कूड़े का अंबार लगा हुआ है। इसी कूड़े में वाईफाई के तार काटकर फेंक दिए गए हैं। इससे लोगों को आवागमन में समस्या हो रही है। कई बार साइकिल सवार इसमें फंस कर गिर जा रहे हैं। - मंजीत कुमार। 

लखमीपुर गांव में कई रास्ते हैं कच्चे
काशी विद्यापीठ ब्लाॅक के लखमीपुर गांव में कई रास्ते कच्चे हैं। जरा सी बारिश में यहां कीचड़ हो जाता है। इससे लोगों को दिक्कत होती है। कई बार शिकायत करने के बाद भी इसका समाधान नहीं हुआ। - जंग बहादुर पटेल। 

कुम्हारपुरा में गलियों में बह रहा सीवर का पानी
फुलवरिया में कुम्हारपुरा में गलियों में सीवर का पानी बह रहा है। दीपावली पर लोग अपने घरों की सफाई कर रहे हैं, लेकिन सड़क और गलियों में गंदगी है। अभी बारिश न होने पर भी गंभीर स्थिति है। - शम्स आलम।
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