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Varanasi News: चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण आते-जाते हैं पाणिग्रहण जिंदगी में एक बार होता है; श्रीमद्भागवत कथा

Sun, 31 May 2026 12:57 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन पारायण, हवन-पूजन और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रवचन में कहा गया कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण तो समय-समय पर आते-जाते रहते हैं, लेकिन पाणिग्रहण संस्कार जीवन में केवल एक बार होता है। कथा के दौरान धार्मिक महत्व और वैवाहिक जीवन की पवित्रता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
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पातालपुरी मठ के महंत बालक देवाचार्य। - फोटो : संवाद
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Varanasi News: श्रीकृष्ण उत्सव सेवा समिति, हैहयवंशी क्षत्रिय कसेरा महासभा तथा वाराणसी किराना व्यापार समिति की ओर से रामकटोरा स्थित चिंतामणि बाग में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सभी श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर रहे।

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पातालपुरी मठ के महंत बालक देवाचार्य ने कहा कि दुनिया में ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला चंद्र ग्रहण, दूसरा सूर्य ग्रहण और तीसरा पाणिग्रहण है। चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण वर्ष में आते हैं, लेकिन पाणिग्रहण वह ग्रहण है, जो मानव जाति के लिए प्रेम का बंधन है। जिसके साथ पाणिग्रहण हुआ, उसका हाथ जिंदगी भर प्रेमपूर्वक थामकर जीवन बिताना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में आकर पापाचारी, अत्याचारी और अनाचारी कंस का वध किया। उन्होंने रुक्मिणी और राधारानी के बीच का अंतर भी समझाया। हर मंदिर में अथवा जहां भी श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित होती है, वहां उनके साथ राधाजी की मूर्ति ही क्यों होती है, जबकि विवाह माता रुक्मिणी से हुआ था। इसका कारण यह है कि माता रुक्मिणी लक्ष्मी स्वरूपा हैं।

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कथा में शामिल लोग। - फोटो : संवाद
उन्होंने भक्त सुदामा के चरित्र का भी मार्मिक वर्णन किया। कहा कि भगवान अपने भक्तों की सदैव परिपूर्णता का ध्यान रखते हैं। बस उनके चरणों में स्वयं को समर्पित करने की आवश्यकता है। श्रद्धा से प्रभु को याद करें, थोड़ा अर्पण करें और उनकी कृपा से मनोवांछित फल एवं समृद्धि प्राप्त करें। इसके लिए प्रभु पर अटूट विश्वास, भरोसा और समर्पण जरूरी है।

सात दिनों में यज्ञ एवं श्रीमद्भागवत पारायण पूर्ण होने पर आचार्य श्री कलाधर गुरु ने हवन कर पूर्णाहुति कराई। भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। संस्था के अध्यक्ष अशोक कसेरा ने अतिथियों और कथा समारोह में सहयोग करने वालों को सम्मानित किया। इस मौके पर विनोद कसेरा, भइयालाल, मनीष कसेरा, सोनू कसेरा, विष्णु कसेरा मौजूद रहे।
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