फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: घुप अंधेरे में भगवान पहुंचे असि के मंदिर, श्रद्धालुओं को दिए दर्शन; 225 साल से चली आ रही परंपरा

Tue, 01 Jul 2025 05:31 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी में आयोजित तीन दिवसीय लक्खा मेले का समापन हो गया। लाखों भक्तों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। भारी सुरक्षा के साथ रथयात्रा क्षेत्र में प्रभु के जयकारे लगते रहे। भगवान जगन्नाथ देर रात असि स्थित अपने मंदिर में फिर से विराजमान हो गए।
विज्ञापन
रथयात्रा मेले में लगी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Rathyatra 2025: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को असि स्थित जगन्नाथ मंदिर से मनफेर के लिए रथयात्रा निकले भगवान जगन्नाथ तीन दिवसीय रथयात्रा मेला के बाद सोमवार को भोर में चार बजे असि के जगन्नाथ मंदिर पहुंच गए।

विज्ञापन


रथयात्रा मेले के तीसरे दिन रविवार को भोर 3 बजे तक श्रद्धालुओं को दर्शन देने के बाद आरती कर भगवान के रथ के पट बंद कर दिए गए। इसके बाद पूरे रथयात्रा क्षेत्र की बिजली को काटकर घुप अंधेरे (ब्लैक आउट) कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को चार पहिया वाहन में बैठाकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच असि स्थित जगन्नाथ मंदिर लाया गया। 

जगन्नाथ मंदिर पहुंचने पर भी क्षेत्र की लाइट काट दी गई, यहां पर भी भगवान घुप अंधेरे में मंदिर में पहुंचे। पुजारी राधे श्याम पांडे ने अंधेरे के बीच तीनों विग्रहों को गर्भगृह में स्थापित किया। उन्होंने बताया कि 225 साल से इसी तरह की परंपरा चली आ रही है। 
विज्ञापन


रथयात्रा मेले के अंतिम दिन 3 बजे भगवान की आरती होती है। इसके बाद मंदिर का पट बंद कर पूरे क्षेत्र की लाइट काटकर प्रभु को घुप अंधेरे में असि से जगन्नाथ मंदिर लाया जाता है। यहां भी क्षेत्र में बिजली काटकर वह अंधेरे में भगवान को गर्भगृह में स्थापित किया जाता है।

विज्ञापन

पंचमुखी हनुमानजी से मांगी जाती है अनुमति
आयोजन समिति सदस्य रामयश मिश्र ने बताया कि जब भगवान डोली में बैठकर जब बेनीराम बाग पहुंचते हैं। उनके पूजन आरती करने के पश्चात बेनिराम में स्थित पंचमुखी हनुमानजी की आरती की जाती है। उनसे रथ यात्रा मेले की अनुमति ली जाती है। फिर तीन दिवसीय रथयात्रा मेला 3 बजे भोर में भगवान जगन्नाथ की आरती करने के बाद फिर पंचमुखी हनुमानजी की आरती कर उनसे भगवान को फिर से जगन्नाथ मंदिर ले जाने की अनुमति मांगी जाती है। 

225 साल से ये प्राचीन परंपरा चली आ रही है। तीन दिवसीय रथ यात्रा मेले में भगवान जगन्नाथ की जितने बार भोग व आरती होती है, उतने बार ही पंचमुखी हनुमानजी को भी भोग और आरती होती है। इस अवसर पर ट्रस्ट श्रीजगन्नाथजी के सचिव शैलेश त्रिपाठी, न्यासी सुमित राय, उत्कर्ष श्रीवास्तव आयोजन समिति के रामयश मिश्र, आशु त्रिपाठी, हिमांशु राय, दिलीप मिश्रा, यज्ञ नारायण मिश्रा मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें