फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: न्याय, व्याकरण, मीमांसा एवं वेदांत पर हुआ शास्त्रार्थ, देशभर के विद्वानों का हुआ जुटान

Fri, 25 Jul 2025 06:01 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी में आए देशभर के विद्वानों ने विभिन्न गूढ़ विषयों पर शास्त्रार्थ किया। इसके साथ ही सनातन संस्कृति पर भी गहनता से विमर्श किया। करपात्र प्राकट्योत्सव पर सैकड़ों भक्तों की भी भीड़ रही।
विज्ञापन
करपात्र प्राकट्योत्सव पर शास्त्रार्थ करते विद्वान। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Varanasi News: दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल के प्रांगण में चल रहे 14 दिवसीय करपात्र प्राकट्योत्सव के चौथे दिन न्याय, व्याकरण, मीमांसा एवं वेदांत के विभिन्न गूढ़ विषयों पर शास्त्रार्थ हुआ। अखिल भारतीय धर्म सम्राट करपात्र शास्त्रार्थ सभा में काशी एवं देश के विभिन्न प्रांतों से आए विद्वानों ने अनेक शास्त्रीय अनसुलझे रहस्यों को प्रकाशित करने का प्रयास किया।

विज्ञापन


गुरुवार को धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के पावन सानिध्य में सर्वप्रथम गोवा से पधारे विद्वान आचार्य देवदत्त पाटिल ने ऊह पदार्थ की मीमांसा शास्त्र सम्मत व्याख्या करते हुए प्राचीन सिद्धांत का समर्थन किया तथा अनेक नवीन तथ्यों को प्रकाशित किया। 

शृंगेरी, कर्नाटक से आए व्याकरण विद्वान् पंडित नागराज भट्ट ने कर्म के स्वरूप एवं प्रकार पर न्याय एवं व्याकरण शास्त्र के अनुसार गंभीर चर्चा करते हुए सिद्धांत के रूप में व्याकरण मत की स्थापना की। उन्होंने गदाधर भट्टाचार्य एवं भतृहरि के सिद्धांतों का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

विभिन्न मसलों पर हुई चर्चा

काशी के युवा विद्वान पं सात्विक जाडिहाल ने हेत्वाभास के विभिन्न आयामों पर न्यायशास्त्रीय क्रोडपत्रों के आधार पर समीक्षा की। पुणे के नैयायिक पं. राजेश्वर देशमुख ने शब्द प्रमाण की आवश्यकता का प्रतिपादन करते हुए न्याय एवं वैशेषिक मत की गंभीर विवेचना की। 

द्वितीय सत्र में गोवा के विद्वान पं. दत्तानुभव टेंगसे ने सामान्य लक्षणा सन्निकर्ष को केंद्र बनाकर न्याय एवं वेदांत मत की तुलनात्मक समीक्षा की तथा वेदांत मत को सिद्धांत के रूप में प्रतिष्ठित करते हुए सामान्य लक्षणा का निराकरण किया। तिरुपति के आचार्य रामलाल शर्मा ने हेत्वाभास के लक्षण का कालीशंकर भट्टाचार्य द्वारा समर्थित स्वरूप पर विमर्श किया। 

काशी के कुप्पा विश्वनाथ एवं रामकृष्ण मिश्र ने क्रमशः व्याकरण एवं वेदांत के सिद्धांतों पर आधारित शास्त्रार्थ प्रस्तुत किया। चर्चा में पं. मणि द्रविड़ शास्त्री, पं. प्रियव्रत पाटिल, आचार्य ब्रजभूषण ओझा, पं. ज्ञानेंद्र सांपकोटा आदि विद्वानों ने भाग लिया। सभा का शुभारंभ तिरुपति से आये आचार्य गणपति भट्ट ने वैदिक मंगलाचरण से किया। विद्वानों का स्वागत पं. जगजीतन पांडेय ने किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें