जिले के 1145 बेसिक स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चे अब देश के महान वैज्ञानिकों, गणितज्ञों समेत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले भारतीय विभूतियों को पढ़ेंगे। बौधायन, चरक और वराहमिहिर जैसी अनेक महत्वपूर्ण शख्सियतों को परिषदीय विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान ने कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए ‘हमारे महान वैज्ञानिक एवं गणितज्ञ’ सप्लीमेंट्री बुक तैयार की है, जिसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक युग के गणितज्ञों, वैज्ञानिकों के साथ आयुर्वेद और खगोल शास्त्र में अद्वितीय योगदान करने वाली विभूतियों के बारे में जानकारी दी गई है।
सुश्रुत को प्लास्टिक सर्जरी का जनक कहा जाता है। महर्षि चरक को आयुर्वेद का प्रणेता। इसी तरह भारतीय अंक पद्धति, जोड़-घटाना, शून्य, अनंत आदि भारतीय गणितज्ञों की दुनिया को महान देन है। इन विभूतियों को अब शुरुआती कक्षाओं के पाठ्यक्रम में ही शामिल कर बच्चों को इनसे परिचित कराने की तैयारी है। एक से पांच तक के बच्चों के लिए सप्लीमेंट्री बुक में इन महान शख्सियतों के बारे में पढ़ाया जाएगा।
गणित के क्षेत्र में बौधायन, वराहमिहिर, चरक, रामानुजन, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एम विश्वेश्वरैया, भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में विक्रम साराभाई, होमी जहांगीर भाभा, रसायन विज्ञान के क्षेत्र में शांतिस्वरूप भटनागर, टीआर शेषाद्री, पक्षी विज्ञान में सालिम अली जैसी शख्सियतों के योगदान से रूबरू कराया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अरविंद पाठक ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत खास शख्सियतों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।