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Varanasi News: वन स्टॉप सेंटर में काउंसिलिंग से सुलझ रहे 70% विवाद, हर महीने 150 महिलाओं को राहत; जानें खास

Sat, 09 May 2026 03:46 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए सहारा बन रहा है। पांडेयपुर, चोलापुर और रामनगर केंद्रों में हर महीने 150 से अधिक मामलों का समाधान हो रहा है। काउंसिलिंग से 60-70 फीसदी पारिवारिक विवाद सुलझाए जा रहे हैं, जबकि कई महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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वन स्टॉप सेंटर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Varanasi News: वाराणसी जिले में वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के दुखों का सहारा बन रहा है। पांडेयपुर, चोलापुर और रामनगर में संचालित वन स्टॉप सेंटर में हर महीने 150 से अधिक महिलाओं के समस्याओं का समाधान हो रहा है। इनमें करीब 30 फीसदी महिलाओं को एनजीओ और स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उन्हें रोजगार दिलाया जा रहा है। इसके माध्यम से महिलाएं महीने के लाखों कमा रही हैं।

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काउंसिलिंग से हो रहा विवादों का निपटारा : वन स्टॉप सेंटर पांडेयपुर की काउंसलर खुशबू सिंह बताती हैं कि महिलाओं में वन स्टॉप सेंटर को लेकर जागरूकता बढ़ी है। जिसके कारण एक साल पहले तक जहां हर महीने मुश्किल से 50 केस आते थे, इस समय इसकी संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई है। 

इनमें घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, धोखधड़ी समेत तमाम मामले आ रहे हैं। अधिकतर मामलों में दोनों पक्ष की काउंसिलिंग के बाद से ही विवादों का निपटारा कर दिया जा रहा है। चोलापुर सेंटर की प्रभारी पूजा सिंह बताती हैं कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं वन स्टॉप सेंटर आने से डरती थीं, लेकिन अब उनका डर समाप्त हो रहा है।

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चोलापुर की एक महिला घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का शिकार थीं। घर से निकाले जाने के बाद वह पूरी तरह टूट चुकी थीं। रीता ने चोलापुर वन स्टॉप सेंटर में शरण ली। सेंटर प्रभारी पूजा सिंह ने उनकी काउंसिलिंग की, उन्हें कानूनी सहायता भी दिलाई गई। इसके बाद उन्हें एक स्थानीय हस्तकला एनजीओ से जोड़ा, जहां उन्होंने बनारसी सिल्क की बुनाई और डिजाइनिंग सीखी। आज वह स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।

पांडेयपुर निवासी एक महिला के पति की मृत्यु के बाद उन पर दो बच्चों की जिम्मेदारी आ गई थी। आय का कोई साधन न होने के कारण वह अवसाद में थीं। वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श मिला और उनकी रुचि के अनुसार उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह अपना छोटा सा अचार और पापड़ का स्टार्टअप चला रही हैं। वह महीने के 20 से 25 हजार रुपये कमा रही हैं और अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हैं।
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हमारे पास आने वाले अधिकतर मामलों में संवाद की कमी एक बड़ा कारण होती है। काउंसिलिंग के जरिये हम 60 से 70 प्रतिशत पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने में सफल हो रहे हैं। वहीं, जो महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर हम उनके स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं, ताकि वे किसी पर निर्भर न रहें। - रश्मि दुबे, प्रभारी, वन स्टॉप सेंटर।
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