फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोचना पड़ता है शौचालय के लिए

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

वाराणसी। जहां सोच वहां शौचालय... इस स्लोगन से हर कोई भलीभांति वाकिफ है। हालांकि जिले का पुलिस महकमा अभी भी शौचालय को लेकर गंभीर नहीं है। यदि महकमा गंभीर होता तो हर थाने और चौकियों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग यूरिनल और टॉयलेट की व्यवस्था जरूर होती। इस समस्या के चलते महिला पुलिसकर्मियों को शौचालय के लिए सोचना पड़ता है और आखिरी में उनके सामने पुरुष पुलिसकर्मियों का शौचालय ही विकल्प के तौर पर बचता है। महकमे के अफसरों का दावा है कि अगले एक से डेढ़ माह में यह समस्या दूर कर ली जाएगी।
सारनाथ थाने में 25 महिला पुलिसकर्मी, सुलभ शौचालय ही विकल्प
सारनाथ थाने में तैनात 25 महिला कांस्टेबल के लिए शौचालय का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। जगह चिह्नित कर उस पर शौचालय के लिए कमरा बनाने का काम शुरू तो कर दिया गया लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। मजबूरी में महिला कांस्टेबल को थाने से दूर चौराहे पर बने सुलभ शौचालय में जाना पड़ता है।
विज्ञापन

जंसा थाने में 11 महिला कांस्टेबल, नहीं है टॉयलेट की कोई व्यवस्था
जिले के ग्रामीण इलाके के जंसा थाने में 11 महिला कांस्टेबल तैनात हैं, लेकिन उनके लिए अलग से शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते महिला पुलिसकर्मियों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल जल्द शौचालय निर्माण की कोई उम्मीद भी महिला कांस्टेबल को नहीं दिखाई दे रही है। इसी तरह से पिछले साल ग्रामीण इलाके में खुले सिंधौरा थाने में भी महिला कांस्टेबल के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है।
कई जगह कॉमन शौचालय, एक को करनी पड़ती है निगरानी
जैतपुरा, आदमपुर व कोतवाली थाना और अखरी व राजातालाब चौकी सहित कई अन्य जगहों पर एक कॉमन शौचालय है। इनका इस्तेमाल महिला और पुरुष पुलिसकर्मी दोनों ही करते हैं। ऐसे में जब कोई महिला पुलिसकर्मी टॉयलेट जाती है तो दूसरी उसकी निगरानी करती है। कॉमन शौचालय के चलते कई बार स्थिति असहज भी हो जाती है, लेकिन मजबूरी में सब कुछ झेलना पड़ता है। वहीं पिछले साल खुले लालपुर पांडेयपुर थाने में जुगाड़ से अस्थायी शौचालय की व्यवस्था की गई है।
होनी चाहिए व्यवस्था, होती है बहुत परेशानी
कांस्टेबल नेहा, पुष्पा, रत्ना, संध्या, स्वाति, पूर्णिमा और सोनिका पाल ने शुक्रवार को ‘अमर उजालाÓ से कहा कि सभी थानों और चौकियों में लेडीज और जेंट्स के अलग-अलग टॉयलेट और यूरिनल होना चाहिए। कॉमन शौचालय में बहुत दिक्कत होती है और अच्छा भी नहीं लगता है। प्राइवेसी बहुत जरूरी होती है। इसी तरह से महिला पुलिसकर्मियों के लिए थानों में अलग से रेस्ट रूम भी होना चाहिए।
विज्ञापन

जिन भी थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से शौचालय नहीं है, वहां व्यवस्था कराई जा रही है। आगामी दिनों में जिले के सभी थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए हर हाल में अलग से शौचालय होंगे। - अमित पाठक, एसएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें